10 फरवरी से शुरू होगा फाइलेरिया उन्मूलन अभियान, 63 लाख आबादी को दवा सेवन का लक्ष्य
10 फरवरी से शुरू होगा फाइलेरिया उन्मूलन अभियान, 63 लाख आबादी को दवा सेवन का लक्ष्य
:: जिलाधिकारी की अध्यक्षता में आयोजित जिला समन्वय समिति की बैठक में लिया गया निर्णय वरीय संवाददाता, मुजफ्फरपुर जिले को हाथीपांव (फाइलेरिया) जैसी गंभीर बीमारी से मुक्त करने और स्वास्थ्य सेवाओं को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप सुदृढ़ करने के उद्देश्य से सोमवार को जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन की अध्यक्षता में जिला समन्वय समिति की बैठक आयोजित की गई. बैठक में 10 फरवरी से सर्वजन दवा सेवन अभियान शुरू करने का निर्णय लिया गया. डीपीएम रेहान अशरफ ने बताया कि जिले में तीन नए एनक्वास प्रमाणित स्वास्थ्य केंद्र जुड़े हैं. इनमें रेपुरा (मीनापुर), नरौलीडीह (मुशहरी) और विशुनपुर (बंदरा) शामिल हैं. इन केंद्रों के प्रमाणन से स्थानीय लोगों को गुणवत्तापूर्ण और मानक आधारित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होंगी. जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि इन केंद्रों की सक्रिय भूमिका फाइलेरिया उन्मूलन अभियान में भी सुनिश्चित की जाए. अधिकारियों ने बताया कि जिले की 63.16 लाख से अधिक आबादी को इस अभियान के तहत सुरक्षित करना लक्ष्य है. वर्ष 2025 की नाइट ब्लड सर्वे रिपोर्ट के अनुसार जिले में माइक्रोफाइलेरिया संक्रमण की औसत दर 2.50 प्रतिशत है. बंदरा में यह दर 6.63 प्रतिशत, मुशहरी में 3.17 प्रतिशत और मीनापुर में 1.17 प्रतिशत दर्ज की गई है. फाइलेरिया उन्मूलन के लिए 17 दिनों का सघन एक्शन प्लान तैयार किया गया है. पहले 14 दिनों तक आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर प्रत्यक्ष निगरानी में दवा खिलाएंगी, जबकि अंतिम तीन दिनों में छूटे लोगों के लिए बूथ कैंप लगाए जाएंगे. अभियान के लिए 2,537 टीमों का गठन किया गया है, जिनमें 4,073 आशा कार्यकर्ताओं के साथ आंगनबाड़ी सेविकाएं और स्वयंसेवक शामिल हैं. उम्र और ऊंचाई के अनुसार आइवरमेक्टिन, डीईसी और एल्बेंडाजोल की दवाएं दी जाएंगी, जिन्हें खाली पेट नहीं लेने की सलाह दी गई है. बैठक में सिविल सर्जन डॉ. अजय कुमार समेत अन्य स्वास्थ्य अधिकारी उपस्थित थे.
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