:: मशरूम क्लस्टर घोटाला प्रतिनिधि, मुशहरी मुशहरी प्रखंड में मशरूम उत्पादन के नाम पर किसानों के साथ बड़ा धोखा हुआ है. जीविका क्लस्टर को स्वीकृत 72 लाख 67 हजार 25 रुपये की राशि का गबन कर लिया गया है. मामले में उत्तर बिहार ग्रामीण बैंक की मुशहरी शाखा ने संबंधित एजेंसी मेसर्स ग्रेविटी एग्रो एंड एनर्जी के खिलाफ धोखाधड़ी और गबन की प्राथमिकी दर्ज कराई है. क्या है पूरा मामला : जीविका की महिलाओं के समूह को मशरूम उत्पादन के लिए उत्तर बिहार ग्रामीण बैंक ने कर्ज स्वीकृत किया था. आरोप है कि कर्ज की यह राशि सीधे काम करने वाली एजेंसी मेसर्स ग्रेविटी एग्रो एंड एनर्जी के खाते में भेज दी गई. इस एजेंसी को न सिर्फ किसानों को मशरूम उत्पादन का सामान देना था, बल्कि उन्हें प्रशिक्षण भी देना था. महिलाओं ने जब एजेंसी से संपर्क करने की कोशिश की, तो उनसे बात नहीं हो पायी. शक होने पर जब उन्होंने अपने बैंक खातों की जांच की, तो उनके होश उड़ गए. सभी समूहों के खातों से कुल 72 लाख 67 हजार 25 रुपये एक ही बैंक खाते (नंबर 100001130010949) में ट्रांसफर किए गए थे. सबसे बड़ी बात यह थी कि एजेंसी ने न तो कोई सामान दिया और न ही कोई काम किया. शिकायतों के बाद भी कार्रवाई नहीं : इस घोटाले का पता चलने पर जीविका की सदस्य महिलाओं ने पूर्व जिला पार्षद मुक्तेश्वर प्रसाद सिंह से मदद मांगी. मुक्तेश्वर प्रसाद सिंह ने जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन से इसकी शिकायत की. डीएम के आदेश पर बीडीओ मुशहरी ने जांच की, लेकिन जांच रिपोर्ट में क्या मिला, इसका पता नहीं चल पाया और कोई कार्रवाई नहीं हुई. हाल ही में, मनिका गाजी की जीविका सदस्य किरण देवी के पति पप्पू कुमार ने उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा के मुशहरी दौरे के दौरान उन्हें लिखित शिकायत दी. इसके बावजूद, एक महीने से अधिक समय तक कोई कार्रवाई नहीं हुई. बैंक पर भी उठे सवाल : स्थानीय लोगों के दबाव और शिकायतों के बाद आखिरकार बैंक ने कार्रवाई की. बैंक के शाखा प्रबंधक संजय कुमार गुप्ता ने 8 सितंबर को मुशहरी थाने में एजेंसी के प्रोपराइटर कुमारी शिवांगी और कार्यकारी व्यक्ति आशुतोष मंगलम के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई. मामले में मुक्तेश्वर प्रसाद सिंह ने बैंक की भूमिका पर भी सवाल उठाया है. उनका कहना है कि यह जांच होनी चाहिए कि बैंक ने किस आधार पर सीधे एजेंसी के खाते में पैसे ट्रांसफर किए और किस बैंक का खाता था. उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले के पीछे जो भी दोषी हैं, उन सभी पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए. प्राथमिकी में जिन समूहों के साथ धोखाधड़ी हुई है, उनका भी जिक्र नहीं किया गया है, जिससे बैंक की भूमिका और भी संदिग्ध हो गई है. बताया जाता है कि धोखाधड़ी का शिकार होने वाले समूहों में मौसम सीएलएफ, संगम सीएलएफ, उत्तम सीएलएफ और सर्वोत्तम सीएलएफ 1 एवं 2 शामिल हैं. अनुमान है कि प्रति समूह से 35 लाख रुपये निकाले गए हैं. थाना प्रभारी जयकिशोर सिंह ने बताया कि मामले में प्राथमिकी दर्ज हो गयी है. इसका अनुसंधान किया जा रहा है.
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