Mit International Conference: मुजफ्फरपुर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) में रासायनिक एवं चर्म प्रौद्योगिकी विभाग तथा फार्मेसी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का शनिवार को शुभारंभ हुआ. हाइब्रिड मोड में आयोजित इस सम्मेलन में देशभर के 19 प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों के शिक्षाविदों, वैज्ञानिकों, उद्योग विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं ने भाग लिया. एमआईटी के प्राचार्य प्रो. मिथिलेश कुमार झा ने अतिथियों का स्वागत किया और कहा कि स्वच्छ व हरित ऊर्जा आने वाले समय का सबसे महत्वपूर्ण शोध क्षेत्र है.
10 राज्यों के 119 लेखक व 74 शोधकर्ता ले रहे भाग
प्राचार्य प्रो. मिथिलेश कुमार झा ने बताया कि सम्मेलन में 10 राज्यों का प्रतिनिधित्व हो रहा है, जिसमें 44 शोध सार, 74 प्रस्तुतकर्ता शोधकर्ता और 119 लेखक शामिल हैं.
सम्मेलन के प्रमुख बिंदु:
- नवीकरणीय ऊर्जा पर जोर: मुख्य अतिथि प्रो. मणि कांत पासवान (निदेशक, संत लोंगोवाल इंस्टीट्यूट) ने न्यूक्लियर ऊर्जा, हाइड्रोजन ईंधन, हाइड्रोजन संचालित ट्रेनों और विमानों पर चल रहे अनुसंधानों की जानकारी दी.
- अंतर्विषयी अनुसंधान: गया तारामंडल के निदेशक डॉ. संदीप तिवारी ने कहा कि ऊर्जा चुनौतियों का समाधान अंतर्विषयी शोध से ही संभव है, जिससे भारत वैश्विक स्तर पर मजबूत बनेगा.
- प्रतिष्ठित संस्थानों की भागीदारी: एनआईटी दुर्गापुर, एनआईटी जालंधर, एनआईटी हमीरपुर और आईआईटी रुड़की के विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे.
कार्यक्रम में सीपेट के संयुक्त निदेशक डॉ. संजीव कुमार जैन, आईआईटी रुड़की के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. इन्द्र मणि मिश्रा, सीएसआईआर के पूर्व वैज्ञानिक डॉ. संजय सेनगुप्ता समेत कई दिग्गज शामिल हुए. उद्घाटन सत्र का समापन डॉ. अविजित घोष के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ.
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