मुजफ्फरपुर: जिले के बेनिबाद थाना क्षेत्र में एक वर्ष पूर्व सात वर्षीय मासूम बच्चे के साथ हुए अप्राकृतिक यौनाचार के संगीन मामले में न्यायालय ने त्वरित और कड़ा फैसला सुनाया है. पॉक्सो एक्ट संख्या-तीन की विशेष न्यायाधीश नूर सुल्ताना की अदालत ने मामले की अंतिम सुनवाई करते हुए आरोपित उदय कुमार उर्फ उदय दास को दोषी करार दिया. अदालत ने मुजरिम को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है. इसके साथ ही दोषी पर 20 हजार रुपये का आर्थिक जुर्माना भी लगाया गया है. जुर्माना राशि का भुगतान न करने की स्थिति में दोषी को तीन माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा.
विशेष लोक अभियोजक ने पेश किए सात अहम गवाह
मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक राजीव रंजन राजू ने पैरवी करते हुए न्यायालय के समक्ष कुल सात गवाहों को प्रस्तुत किया. अभियोजन के साक्ष्य और गवाहों के संकलन में अधिवक्ता मिकी ने महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया. अनुसंधानकर्ता (आईओ) ने मामले की तत्परता से जांच करते हुए आरोपित के विरुद्ध आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल किया था. गवाहों के सुसंगत बयानों और चिकित्सकीय साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने आरोपित को नाबालिग के साथ घिनौना कृत्य करने का दोषी पाया.
चॉकलेट खरीदने गया था मासूम, दुकान के भीतर की दरिंदगी
यह मामला 1 जुलाई का है, जब पीड़िता की दत्तक मां ने बेनिबाद थाने में न्याय की गुहार लगाते हुए लिखित प्राथमिकी दर्ज कराई थी. प्राथमिकी के अनुसार, महिला पिछले दो वर्षों से इस सात वर्षीय बच्चे का पालन-पोषण अपने दत्तक पुत्र के रूप में कर रही थी. घटना वाले दिन सुबह के समय वह बच्चे को कुछ रुपये देकर पीडीएस (राशन) की दुकान पर गई थी. जब वह घर लौटी तो मासूम बच्चा आंगन में बैठकर बुरी तरह रो रहा था. पूछने पर बच्चे ने आपबीती सुनाई कि वह आरोपित उदय दास की दुकान पर चॉकलेट खरीदने गया था, जहां आरोपित ने उसे बहला-फुसलाकर उसके साथ अप्राकृतिक यौनाचार किया.
कोर्ट के कड़े फैसले से अपराधियों में संदेश
अदालत के इस फैसले का स्वागत करते हुए विशेष लोक अभियोजक ने कहा कि मासूम बच्चों के खिलाफ होने वाले ऐसे जघन्य अपराधों में यह फैसला समाज के लिए एक सख्त नजीर साबित होगा. अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद त्वरित न्याय सुनिश्चित करते हुए अभियुक्त को सीधे जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया. फैसले के बाद न्यायालय परिसर में दिनभर इस फैसले की चर्चा रही और पीड़ितों ने त्वरित न्याय मिलने पर राहत की सांस ली है.
