'ओम का नियम क्या है?' मुजफ्फरपुर DM के सवाल पर तारे गिनने लगे छात्र, क्लास में खुद बैठे जिलाधिकारी

मुजफ्फरपुर के जिला स्कूल में डीएम के औचक निरीक्षण के दौरान छात्रों की बुनियादी शैक्षणिक समझ परखी गई. कुछ विद्यार्थी ओम के नियम से जुड़े सवालों पर अटक गए, जिसके बाद डीएम ने शिक्षकों को पढ़ाई का स्तर सुधारने के निर्देश दिए.

जिला स्कूल पहुंचे डीएम: जिलाधिकारी कुमार गौरव ने बुधवार को राजकीय जिला स्कूल (सरस्वती विद्या निकेतन मॉडल स्कूल) का औचक निरीक्षण किया. करीब 45 मिनट तक चले निरीक्षण में डीएम ने अलग-अलग कक्षाओं में बच्चों के साथ बैठकर पढ़ाई का स्तर और शिक्षकों की शिक्षण शैली देखी. इस दौरान उन्होंने विद्यार्थियों से विज्ञान और गणित के कई बुनियादी सवाल पूछे. कुछ सवालों के जवाब नहीं मिलने पर डीएम ने शिक्षकों को बच्चों की बुनियादी समझ मजबूत करने की सख्त हिदायत दी.

ओम के नियम पर उलझे छात्र

कक्षा में संवाद के दौरान डीएम ने विद्यार्थियों से भौतिकी, रसायन, जीव विज्ञान और गणित से जुड़े सवाल किए. ओम के नियम और सम्यक विकास से संबंधित सवाल पूछे जाने पर कुछ छात्र संतोषजनक जवाब नहीं दे सके.

विद्यार्थियों की इस स्थिति पर डीएम ने नाराजगी जताई और शिक्षकों से सीखने के बुनियादी स्तर में सुधार लाने को कहा. हालांकि अन्य कक्षाओं में विद्यार्थियों ने विज्ञान और गणित के सवालों के सही जवाब भी दिए. इससे बच्चों की क्षमता का बेहतर प्रदर्शन सामने आया.

क्या है ओम का नियम?

ओम का नियम भौतिक विज्ञान का एक बुनियादी सिद्धांत है. इसका प्रतिपादन वैज्ञानिक जॉर्ज साइमन ओम ने किया था. इसके अनुसार किसी चालक की भौतिक अवस्थाएं स्थिर रहने पर उसके सिरों के बीच विभवांतर उसमें बहने वाली विद्युत धारा के समानुपाती होता है.

स्कूल निरीक्षण के दौरान इसी तरह के बुनियादी विषयों पर विद्यार्थियों की समझ परखी गई, ताकि यह पता चल सके कि कक्षा में पढ़ाए गए विषयों को बच्चे वास्तव में कितना समझ पा रहे हैं.

किताबें नहीं मिलने पर डीएम ने जताई हैरानी

निरीक्षण के दौरान कई विद्यार्थियों के पास मूल पाठ्य-पुस्तकें नहीं दिखीं. इस पर डीएम ने आश्चर्य जताते हुए निर्देश दिया कि प्रत्येक बच्चे के पास जरूरी किताबें उपलब्ध होनी चाहिए.

उन्होंने कहा कि किताबें होने से बच्चे घर पर भी कक्षा में पढ़ाए गए विषयों की दोबारा पढ़ाई कर सकेंगे. स्मार्ट क्लास और डिजिटल संसाधनों का अधिक से अधिक इस्तेमाल कर विद्यार्थियों को पढ़ाई से जोड़ने पर भी जोर दिया गया.

मेधावी बच्चों को अलग सेक्शन में रखने पर आपत्ति

कक्षाओं के निरीक्षण में एक सेक्शन में अधिकांश मेधावी विद्यार्थियों के होने पर भी डीएम ने आपत्ति जताई. उन्होंने सभी सेक्शनों में मेधावी बच्चों को संतुलित रूप से रखने का निर्देश दिया.

डीएम का मानना है कि इससे मेधावी विद्यार्थी कमजोर बच्चों के लिए प्रेरणा बन सकेंगे. साथ ही विद्यार्थियों की अकादमिक प्रगति की नियमित निगरानी के लिए साप्ताहिक टेस्ट कराने और कमजोर बच्चों के लिए विशेष कक्षाएं चलाने का निर्देश दिया गया.

जिला स्कूल को डीएम ने लिया गोद

राज्य सरकार के सात निश्चय-3 के उन्नत शिक्षा उज्ज्वल भविष्य कार्यक्रम के तहत जिले में संचालित 17 मॉडल स्कूलों की निगरानी के लिए नोडल अधिकारी तैनात किए गए हैं. इसी व्यवस्था के तहत जिलाधिकारी ने राजकीय जिला स्कूल को विशेष रूप से गोद लिया है.

निरीक्षण के दौरान स्कूल में इंटरैक्टिव पैनल बोर्ड लगाने और आवश्यक शिक्षकों की जल्द पदस्थापना की जरूरत भी बताई गई.

भवन और शौचालय के बीच बनेगा बेहतर रास्ता

बरसात के दौरान स्कूल भवन और शौचालय के बीच आने-जाने में बच्चों को होने वाली परेशानी को देखते हुए डीएम ने रास्ते पर पेवर ब्लॉक लगाने और शेड निर्माण का आदेश दिया.

बीएसईआईडीसी के अभियंताओं को स्कूल परिसर के नियमित रख-रखाव और सभी संरचनात्मक कार्यों को गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा कराने का निर्देश दिया गया. निरीक्षण के दौरान जिला शिक्षा पदाधिकारी कुमार अरविंद सिन्हा, माध्यमिक शिक्षा डीपीओ अलका कुमारी समेत कई अधिकारी मौजूद रहे.

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By Prabhat khabar news desk

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