, ठोस कचरा प्रबंधन: बिहार के सभी नगर निकायों को 31 मार्च 2027 तक पूरी तरह कचरा मुक्त करने का लक्ष्य तय किया गया है. राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में मुख्य सचिव की ओर से दाखिल शपथ पत्र के बाद नगर विकास एवं आवास विभाग पूरी तरह एक्शन मोड में है. विभाग ने मुजफ्फरपुर सहित सभी निकायों को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की योजनाओं में तेजी लाने का सख्त आदेश दिया है.
एस्टीमेट ट्रैकिंग से होगी योजनाओं की ऑनलाइन निगरानी
विभाग के अभियंता प्रमुख-सह-विशेष सचिव विनोद कुमार ने सभी मुख्य, अधीक्षण और कार्यपालक अभियंताओं को परियोजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश दिए हैं. कार्यों में तेजी व पारदर्शिता बनाए रखने के लिए 'एस्टीमेट ट्रैकिंग' सिस्टम लागू किया गया है. इसके तहत अधिकारियों को निर्धारित प्रपत्र में नियमित प्रगति रिपोर्ट देनी होगी.
इन प्रमुख कार्यों पर रहेगा विशेष जोर:
- लिगेसी वेस्ट का निस्तारण: वर्षों से डंपिंग यार्ड में जमा पुराने कचरे का त्वरित बायो-माइनिंग व निष्पादन.
- एमआरएफ का निर्माण: सूखे कचरे की छंटाई व रीसाइक्लिंग के लिए मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी का सुचारू संचालन.
- कंपोस्ट प्लांट की स्थापना: गीले कचरे से जैविक खाद तैयार करने की क्षमता में विस्तार.
- समयबद्ध टेंडर प्रक्रिया: निविदा आवंटन के बाद तय सीमा में काम पूरा कराने की अधिकारियों की सीधी जवाबदेही.
मुजफ्फरपुर नगर निगम के लिए बड़ी चुनौती
मुजफ्फरपुर में पुराने कचरे के निस्तारण और डंपिंग ग्राउंड का प्रबंधन लंबे समय से गंभीर समस्या रहा है. एनजीटी की सख्ती के बाद अब नगर निगम प्रशासन को लिगेसी वेस्ट प्रोसेसिंग प्रोजेक्ट को प्राथमिकता से पूरा करना होगा.
लापरवाही पर नपेंगे जिम्मेदार अधिकारी
विभाग ने स्पष्ट किया है कि समय सीमा के भीतर काम पूरा न होने पर कार्यदायी एजेंसियों पर जुर्माना लगेगा और संबंधित लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी.
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