आया एडमिशन का मौसम, बिगड़ रहा बजट

आया एडमिशन का मौसम, बिगड़ रहा बजट

अगले महीने से स्कूलों में शुरू हो जायेगा नया सत्र

एडमिशन फीस, किताब, कॉपी, यूनिफॉर्म और ट्रांसपोर्टेशन का बढ़ गया खर्च

उपमुख्य संवाददाता, मुजफ्फरपुर

स्कूलों में वार्षिक परीक्षा हो चुकी है और अगले महीने से स्कूलों का नया सत्र शुरू होने वाला है. फिर नये क्लास में एडमिशन की प्रक्रिया शुरू होगी. वहीं छोटे बच्चों का नर्सरी में भी दाखिला होगा. बच्चों के एडमिशन में अभिभावक पर आर्थिक बोझ बढ़ने वाला है. निजी स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों की किताबें और स्टेशनरी आइटम की खरीदारी पर ही करीब सात से आठ हजार के खर्च होंगे. इसके अलावा यूनिफॉर्म और नये वर्ग में बच्चों के एडमिशन चार्ज भी स्कूल को देने होंगे. कई निजी स्कूलों ने सिलेबस चेंज कर दिया है, जिससे पुरानी किताबें बच्चे नहीं ले पायेंगे. अभिभावकों को इसके लिये भी अच्छी-खासी रकम खर्च करनी होगी. नये सत्र के लिये पढ़ाई के बाजार पर एक रिपोर्ट –

दुकानदारों को अच्छी बिक्री की उम्मीद

शहर के सभी स्कूलों में नये सत्र के नामांकन की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है. अब अगले महीने में नया स्कूल सत्र शुरू होगा. ऐसे में एक तरफ जहां नये शैक्षणिक सत्र को लेकर बाजार में स्टेशनरी दुकानदारों की अच्छे कारोबार की उम्मीद है, वहीं अभिभावकों को बच्चे की शिक्षा पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ेगा. इस बार यूनिफॉर्म, किताबें, स्टेशनरी और ट्रासपोर्टेशन चार्ज में बढ़ोतरी से अभिभावकों के बजट बिगड़ेगा. इन सभी आइटमों पर करीब 20 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है, जिससे कई परिवारों को वित्तीय चुनौती का सामना करना पड़ेगा.

20 फीसदी तक बढ़ा स्कूल का ट्रांसपोर्टेशन

कई स्कूल के बसों में ट्रांसपोर्टेशन चार्ज में बढ़ोतरी की गयी है. वहीं प्राइवेट वाहन से स्कूल भेजने वाले अभिभावकों को भी अब अधिक चार्ज देना होगा. इस संबंध में ट्रांसपोर्टेशन अभिभावकों को मैसेज भेजना शुरू कर दिया है. ज्यादातर स्कूलों में कांट्रेक्ट से ही बच्चों के ट्रांसपोर्टेशन की सुविधा दी जाती है. इसको लेकर अभिभावक स्कूलों में शिकायत भी नहीं कर सकते. कई स्कूलों में ट्रांसपोर्टेशन चार्ज में 20 फीसदी की बढ़ोतरी की गयी है. नये सत्र में अभिभावकों को स्कूल से बच्चों की बुक लिस्ट और यूनिफॉर्म का बिल दिया जायेगा. यह परिवार का आर्थिक बोझ बढ़ायेगा.

बदल गयी किताबें, कीमत में भी बढ़ोतरी

नये सत्र में कई स्कूलों ने सिलेबस में बदलाव किया है. इसका खर्च अभिभावकों को उठाना पड़ेगा. इस बार सीबीएसइ सिलेबस की किताबें भी महंगी हो गयी है. स्कूलों में सिलेबस नहीं बदलने से कई परिवार दूसरे बच्चों की पुरानी किताबें लेकर अपने बच्चों की पढ़ाई कराते थे, लेकिन स्कूलों के सिलेबस बदलने से अभिभावकों को अब नयी किताबें लेनी होगी. नवमी और दशमी के छात्रों को छोड़कर स्कूल अपने सिलेबस में एनसीइआरटी कि किताबें नहीं रखते. आठवीं तक के बच्चों की सीबीएसइ की किताबें महंगी होने के कारण अभिभावकों को इसकी खरीदारी में अधिक खर्च करना पड़ता है.

अगले महीने से शुरू होगी बिक्री, बाजार तैयार

शहर के किताब और स्टेशनरी दुकानदारों ने स्टॉक कर लिया है. बाजार में हर वर्ग की किताबें सेट में उपलब्ध है. कई स्कूलों में तो राशि लेकर बच्चों को किताब दी जाती है. हालांकि कई स्कूल बच्चों को बुक लिस्ट दे देते हैं. किताब दुकानदारों ने सीबीएसइ के सिलेबस के अनुसार किताबें मंगायी है. कॉपियों का सेट भी रखा गया है. इस महीने के अंत तक सभी स्कूलों के परीक्षाफल घोषित हो जायेंगे. इसके बाद से किताबों और कॉपियों की बिक्री में तेजी आयेगी. किताब दुकानदारों का कहना है कि निजी के अलावा सरकारी स्कूलों के छात्रों के लिये भी एनसीइआरटी की किताबों का स्टॉक किया गया है.

यूनिफार्म की कीमत –

पहले से चौथे वर्ग तक – 1500 – 2000 रुपये

पांचवें से दशवें वर्ग तक – 3090 – 4000 रुपये

बैग की कीमत – 200 – 800 रुपये

किताब – 2000 – 5000 रुपये

यूनिफार्म की शुरू हो गयी खरीदारी

बच्चों की वार्षिक परीक्षा समाप्त होते ही यूनिफॉर्म की खरीदारी शुरू हो गयी है. अभिभावक बच्चों के लिये पैट, शर्ट, टाई, बेल्ट, जूते और मोजा खरीद रहे हैं. जिन बच्चों का पहली बार स्कूल में एडमिशन हो रहा है, उसके लिये ड्रेस का पूरा सेट लिया जा रहा है. इस बार अच्छी खरीदारी की उम्मीद है. अप्रैल से जून तक ड्रेस का बाजार अच्छा रहेगा.

आकाश कंदोई, ड्रेस दुकानदार

कार्टन वाले बैग की डिमांड

बच्चों में कार्टून वाले बैग की डिमांड अधिक है. नर्सरी से वन क्लास तक के बच्चे ऐसे ही बैग पसंद कर रहे हैं. बैग के साथ कार्टून बना पानी के बोतल की भी अच्छी बिक्री हो रही है. अभिभावक खरीदारी के लिये बच्चों को साथ ला रहे हैं और बच्चे अपनी पसंद के अनुसार स्कूल बैग और पानी के बोतल ले रहे हैं. इस बार का बाजार अभी से अच्छा दिख रहा है.

सोहन लाल, बैग विक्रेता

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बिगड़ जाता है पूरे महीने का बजट

बच्चों के नये वर्ग में जाने से पूरा बजट बिगड़ जाता है. जिन घरों में दो बच्चे पढ़ते हैं, उनके लिये तो अप्रैल का महीना काफी मुश्किल भरा होता है. स्कूलों में सिलेबस चेंज करने से खर्च काफी बढ़ता है. इसके अलावा एडमिशन फी सहित अन्य मद में भी अच्छा खासा खर्च हो जाता है. आजकल पढ़ाई इतनी महंगी हो गयी है कि कम बजट वाले परिवारों को दूसरे मद में कटौती करनी पड़ती है

संतोष राज, अभिभावक

हर साल 20 से 30 फीसदी बढ़ोतरी

हर साल बच्चों के एडमिशन, किताब, कॉपी और यूनिफॉर्म के खर्चे में 20 से 30 फीसदी की बढोतरी हो जाती है. इससे बजट बिगड़ना तय है. बच्चों की पढ़ाई से समझौता नहीं किया जा सकता, इसलिये अन्य खर्चे में कटौती करनी पड़ती है. स्कूल फीस से लेकर अन्य मद में करीब एक बच्चे पर 20 हजार का खर्च आ जाता है. आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिये बड़ी समस्या होती है.

सविता, गृहिणी

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Author: PRASHANT KUMAR

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