Human Trafficking: मुजफ्फरपुर जंक्शन पर रेल सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने मानव तस्करी के एक बड़े प्रयास को नाकाम कर दिया. पूर्व मध्य रेल के हाजीपुर मुख्यालय और समस्तीपुर मंडल के निर्देश पर चलाए जा रहे 'ऑपरेशन आहट' के तहत आरपीएफ और बचपन बचाओ आंदोलन (बीबीए) की संयुक्त टीम ने सोमवार को आठ बच्चों को तस्करों के चंगुल से मुक्त कराया. कार्रवाई के दौरान तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया गया, जो बच्चों को मजदूरी कराने के लिए बेंगलुरु ले जा रहे थे.
यशवंतपुर एक्सप्रेस में मिले डरे-सहमे बच्चे
आरपीएफ पोस्ट प्रभारी निरीक्षक मनीष कुमार के नेतृत्व में टीम प्लेटफॉर्म संख्या-3 पर खड़ी 15228 मुजफ्फरपुर-यशवंतपुर एक्सप्रेस की जांच कर रही थी. इसी दौरान सामान्य कोच में कुछ बच्चे डरे-सहमे बैठे मिले. बचपन बचाओ आंदोलन के सहायक परियोजना अधिकारी जय मिश्रा की मौजूदगी में बच्चों से पूछताछ की गई. बच्चों ने बताया कि उन्हें काम कराने के लिए बेंगलुरु ले जाया जा रहा है.
बच्चों के इशारे पर तीन तस्कर दबोचे गए
बच्चों की निशानदेही पर आरपीएफ ने कोच और प्लेटफॉर्म पर मौजूद तीन संदिग्धों को घेरकर पकड़ लिया. गिरफ्तार आरोपितों की पहचान साहेबगंज निवासी मोहम्मद इमरान आलम (21), गरहा निवासी राजकुमार सहनी (28) और बोचहां निवासी संतोष कुमार (19) के रूप में हुई है.
10 से 12 हजार रुपये की नौकरी का दिया था झांसा
पूछताछ में आरोपितों ने स्वीकार किया कि वे बच्चों को 10 से 12 हजार रुपये प्रतिमाह मजदूरी का लालच देकर बेंगलुरु के आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में काम कराने के लिए ले जा रहे थे.
बच्चों को सीडब्ल्यूसी को सौंपा
आरपीएफ ने कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद तीनों आरोपितों और मुक्त कराए गए बच्चों को जीआरपी मुजफ्फरपुर के हवाले कर दिया. जीआरपी ने कांड संख्या-131/26 दर्ज करते हुए भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 143(5), किशोर न्याय अधिनियम, 2015 की धारा 79 तथा बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 की धारा 3/14 के तहत मामला दर्ज किया है. सभी आठ बच्चों को सुरक्षित चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (सीडब्ल्यूसी) को सौंप दिया गया.
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