मच्छर मारने की दवा खरीदी नहीं, कर दिया छिड़काव

मुजफ्फरपुर : नगर निगम में मच्छर मारने की दवा की खरीदारी नहीं हुई. लेकिन इसका छिड़काव कर शहर में मच्छर मारने का काम युद्ध स्तर पर हुआ. फर्जी तरीके से मच्छर मारकर शहर में निगम के कर्मियों ने कागज में वाहवाही बटोरी. इतना ही इस दवा के साथ डीजल और पेट्रोल मिलाकर छिड़काव करना था. […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | March 5, 2016 9:39 AM
मुजफ्फरपुर : नगर निगम में मच्छर मारने की दवा की खरीदारी नहीं हुई. लेकिन इसका छिड़काव कर शहर में मच्छर मारने का काम युद्ध स्तर पर हुआ. फर्जी तरीके से मच्छर मारकर शहर में निगम के कर्मियों ने कागज में वाहवाही बटोरी. इतना ही इस दवा के साथ डीजल और पेट्रोल मिलाकर छिड़काव करना था. इस नाम पर निगम ने डीजल और पेट्रोल की खरीद में पानी की तरह पैसे बहाये.
हालांकि शहर में निगम के प्रयास से मच्छर मरा या नहीं, यह शहरवासी अच्छी तरह जानते हैं. निगम की इस कार्यशैली पर महालेखाकार ने सवाल खड़ा किया है. यह खुलासा ऑडिट रिपोर्ट से हुआ है.
रिपोर्ट के अनुसार, लॉग बुक की जांच में पाया गया कि 3 फरवरी 2009 से 25 दिसंबर 2009 के दौरान कुल 34 लीटर मच्छर रोधी दवा का छिड़काव किया गया. लेकिन इसके भंडार पंजी की जब जांच की गई तो मात्र 20 लीटर दवा ही खरीद की गई थी. लॉग बुक के अनुसार, मच्छर रोधी दवा 100 मिलीलीटर मात्रा के छिड़काव में 12 लीटर डीजल अौर 1.5 लीटर पेट्रोल की खपत 1.30 मिनट में पाया गया. प्राप्त दवा 20 लीटर थी. लेकिन 34.1 लीटर दवा कागज में छिड़काव हुआ.
यानी 14.1 का छिड़काव अधिक दिखाया गया. इसके लिए 1692 लीटर डीजल और 211.5 लीटरपेट्रोल का अधिक उपयोग किया गया. इस पर निगम ने 68741 रुपये बहाये थे. नगर निगम के पास 20 मच्छर रोधी दवा छिड़काव मशीन थी. लेकिन कौन कारगर था. कौन बेकार कोई डाटा मौजूद नहीं था. इसके बाद भी कर्मचारियों और अधिकारियों ने नगर निगम के सभी वार्डों में छिड़काव कागज में ही कर दिया था. दवा छिड़काव की जानकारी लॉग बुक से पता लगाना संभव नहीं था.