Muzaffarpur : रासायनिक खाद से खेतों की उर्वरा शक्ति हो रही कम

Muzaffarpur : रासायनिक खाद से खेतों की उर्वरा शक्ति हो रही कम

प्रतिनिधि, मीनापुर प्रखंड के महदेईया पंचायत भवन पर प्राकृतिक खेती की 13 दिवसीय जागरूकता सह उन्मुखीकरण कार्यक्रम का समापन मंगलवार को हो गया. इसमें एक से आठ जनवरी तक प्राकृतिक खेती के प्रति किसानों को जागरूक किया गया. वहीं नौ से 13 जनवरी तक उन्मुखीकरण कार्यक्रम चलाया गया. बीएओ नागेंद्र कुमार ने प्राकृतिक खेती के फायदे और रासायनिक खाद से होने वाले नुकसान को बताया. वहीं कृषि समन्वयक राजीव कुमार ने प्राकृतिक खेती में प्रयोग होने वाले बीजामृत, जीवामृत, घन जीवामृत, निमास्त्र ब्रह्मस्त्र दशपार्नि अर्क आदि के प्रयोग के तरीके बताये. वहीं लोगों से रासायनिक खाद के प्रयोग को नहीं करने की सलाह दी. वहीं पूर्व आत्मा अध्यक्ष सह नोडल किसान राजकिशोर प्रसाद ने कहा कि सरकार के एक सर्वेक्षण में पाया गया कि मुजफ्फरपुर जिले में रसायनिक खाद का प्रयोग किसान अत्यधिक कर रहे हैं. इस कारण यहां की मिट्टी की उर्वरा शक्ति कम होती जा रही है. इसी कारण प्राकृतिक खेती करने के लिए इस जिले का चयन हुआ है. इसी को लेकर यह कार्यक्रम जिले में चलाया जा रहा है. मीनापुर प्रखंड में दो पंचायत महदेईया और टेंगरारी को लिया गया है. दोनों पंचायतों में एक-एक कलस्टर बनाया गया है़ प्रत्येक कलस्टर में पंचायत के 125 किसानों का चयन किया गया है. इन्हें प्रशिक्षित कर प्राकृतिक खेती कराई जा रही है. इसके लिए चयनित किसानों को सरकार दो-दो हजार करके चार हजार रुपये अनुदान भी देगी. दो साल बाद फिर दूसरी पंचायत का चयन किया जायेगा. प्राकृतिक खेती के लिए एक कल्स्टर में एक बीआरसी का निर्माण किया गया है, जहां प्राकृतिक खेती के इनपुट तैयार किये जायेंगे. मौके पर प्रशिक्षक सह कृषि सखी मीना देवी और वीणा देवी ने इनपुट निर्माण के प्रायोगिक तरीके बताये.

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Author: ABHAY KUMAR

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