…बता कहां मेरे बाबा को छोड़ आया है

…बता कहां मेरे बाबा को छोड़ आया हैफोटो माधवगहवारा व जुलजना की याद में शिया समुदाय ने किया मजलिसमातम के साथ ब्रह्मपुरा स्थित दरबारे हुसैनी से निकाला गया जुलूसवरीय संवाददाता, मुजफ्फरपुरशकीना पूछती है जुलजना से रो रो कर, बता कहां मेरे बाबा को छोड़ आया है, ये किसका खून है माथे पे तेरे, बता कहा […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | November 29, 2015 7:26 PM

…बता कहां मेरे बाबा को छोड़ आया हैफोटो माधवगहवारा व जुलजना की याद में शिया समुदाय ने किया मजलिसमातम के साथ ब्रह्मपुरा स्थित दरबारे हुसैनी से निकाला गया जुलूसवरीय संवाददाता, मुजफ्फरपुरशकीना पूछती है जुलजना से रो रो कर, बता कहां मेरे बाबा को छोड़ आया है, ये किसका खून है माथे पे तेरे, बता कहा मेरे बाबा को छोड़ आया है. नोहाखानी के साथ ही शिया समुदाय के लोग गम में डूब गये. लोगों ने रो रोकर मातम करना शुरू किया. मौका था ब्रह्मपुरा स्स्थित दरबारे हुसैनी में गहवारा व जुलजना के आयोजन का. मजलिस की पेशखानी कमर नकवी मुजफ्फरपुरी व निजामत मौलाना अकील अब्बास ने की. मजलिस को खिताब फरमाते हुए मौलाना इंतेसार मेहदी ने कहा कि इमाम हुसैन हक पर थे, यजीद वातिल पर था. दस मुहर्रम को इमाम ने यजीदी फौज से छह महीने के बेटे जनाबे अली असगर के लिए पानी मांगा. लेकिन यजीदी फौज ने पानी के बदले तीर चला दी. जिससे अली असगर शहीद हो गये. इमाम ने पहले बेटे के जनाजे को दफनाया. उसके बाद करबला के जंग में पहुंचे. यजीदी फौज ने उनकी गरदन पर कुंद खंजर चला कर शहीद कर दिया. इसके बाद इमाम का प्रिय घोड़ा जुलजना ने इमाम के खून को अपने माथे पर मला व बड़ा खेमा में पहुंच कर इमाम की शहादत की सूचना दी. लोगों ने उनकी शहादत को याद करते हुए मातम किया.शहादत को याद कर निकाला गया जुलूसदरबारे हुसैनी से शिया समुदाय ने जुलूस निकाला. जिसमें हजरत अब्बास का अलम, इमाम के बेटे अली असगर का झूला का अलम निकाला गया. साथ ही इमाम के घोड़े जुलजना की याद में घोड़ा शामिल किया गया. जुलूस विभिन्न मार्गाें से होेते हुए बड़ा इमामबाड़ा पहुंचा. इस मौके पर इलाहाबाद के अंजुमने हाशमिया, मऊ के अंजुमने सज्जादिया व हसन चक बंगरा के अंजुमने हाशमिया ने पेशखानी की. जुलूस में सैयद अब्बास यावर, सैयद जुल्फकार अली, सेयद जैगम अली, सैयद शकील अहमद व सैयद हसन बेलाल मुख्य रूप से शामिल थे.