शोध के लिए दो दर्जन प्रोजेक्ट तैयार

मुजफ्फरपुर: बीआरए बिहार विवि विज्ञान व प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) को रिसर्च प्रोजेक्ट भेजने वाला सूबे का पहला विवि बनने की राह पर है. इसके लिए अब तक करीब दो दर्जन प्रोजेक्ट तैयार हो चुके हैं. इसमें व्यक्तिगत के साथ-साथ पीजी विभागों के रिसर्च प्रोजेक्ट शामिल हैं. प्रोजेक्ट निर्माण के लिए आयोजित तीन दिवसीय कार्यशाला के […]

मुजफ्फरपुर: बीआरए बिहार विवि विज्ञान व प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) को रिसर्च प्रोजेक्ट भेजने वाला सूबे का पहला विवि बनने की राह पर है. इसके लिए अब तक करीब दो दर्जन प्रोजेक्ट तैयार हो चुके हैं.

इसमें व्यक्तिगत के साथ-साथ पीजी विभागों के रिसर्च प्रोजेक्ट शामिल हैं. प्रोजेक्ट निर्माण के लिए आयोजित तीन दिवसीय कार्यशाला के आखिरी दिन शिक्षकों ने अपने-अपने रिसर्च प्रोजेक्ट पेश किये हैं. ये सभी प्रोजेक्ट 18 अक्तूबर को कुलपति की अध्यक्षता वाली रिसर्च प्रोजेक्ट कमेटी की बैठक में पेश किया जायेगा.

विशेषज्ञों की टीम प्रत्येक प्रोजेक्ट की समीक्षा करेगी. सुधार के बाद इस माह के अंत तक सभी प्रोजेक्ट डीएसटी को भेज दिये जायेंगे. शिक्षक विकास कार्यालय में 20 अक्तूबर तक रिसर्च प्रोजेक्ट जमा कर सकते हैं.

जरू री नहीं बनाये मेजर प्रोजेक्ट

कार्यशाला के आखिरी दिन डॉ संतोष कुमार ने शिक्षकों को बताया कि डीएसटी सिर्फ मेजर प्रोजेक्ट के लिए ही नहीं, बल्कि छोटे प्रोजेक्ट के लिए भी राशि उपलब्ध कराती है. ऐसे में जरू री नहीं कि आप बड़े या अधिक राशि वाले ही प्रोजेक्ट बनाये. छोटे प्रोजेक्ट के लिए भी विभाग की ओर से 15 से 20 लाख रुपये आसानी से प्राप्त किये जा सकते हैं. उन्होंने शिक्षकों से स्थानीय समस्याओं के निष्पादन से संबंधित शोध प्रोजेक्ट बनाने का सुझाव दिया.

पीजी विभाग के लैब की करें चर्चा

कार्यशाला को संबोधित करते हुए विकास अधिकारी डॉ कल्याण कुमार झा ने कहा, रिसर्च प्रोजेक्ट में लैब की चर्चा करनी है. संबद्ध कॉलेजों में, जहां लैब की सुविधा नहीं है, वहां के शिक्षक अपने रिसर्च प्रोजेक्ट में विवि पीजी विभाग के लैब की चर्चा कर सकते हैं.

ये भी थे मौजूद

डॉ संजय कुमार, डॉ संगीता रानी, डॉ टीएम सिंह, डॉ आरपी यादव, डॉ डीके सिंह, डॉ एसएनपी सिंह, डॉ नीलम कुमारी, डॉ पंकज कुमार, डॉ गोपाल जी व डॉ शिशिर कुमार.

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