मुजफ्फरपुर : जिले के बच्चे एइएस, जेई व चमकी बुखार से पीड़ित न हों, इसके लिए स्वास्थ्य विभाग उन बच्चों का टीकाकरण करा रहा है, जो इससे वंचित रह गये थे. स्वास्थ्य विभाग ने पहले चरण में एक लाख बच्चों को जेई के टीकाकरण का लक्ष्य रखा है. इसके लिए हर प्रखंड के पीएचसी प्रभारियों ने सर्वे करा माइक्रोप्लान तैयार किया है.
जिले में छूटे बच्चों का किया जा रहा जेई टीकाकरण
मुजफ्फरपुर : जिले के बच्चे एइएस, जेई व चमकी बुखार से पीड़ित न हों, इसके लिए स्वास्थ्य विभाग उन बच्चों का टीकाकरण करा रहा है, जो इससे वंचित रह गये थे. स्वास्थ्य विभाग ने पहले चरण में एक लाख बच्चों को जेई के टीकाकरण का लक्ष्य रखा है. इसके लिए हर प्रखंड के पीएचसी प्रभारियों […]

सिविल सर्जन डॉ शैलेश प्रसाद सिंह ने बताया कि हर प्रखंड में एएनएम की टीम बनायी गयी है. यह टीम घर-घर जाकर बच्चों को टीके लगे हैं या नहीं, इसकी जानकारी लेकर छूटे बच्चों का टीकाकरण कर रही है.
इसके अलावा ईंटभट्ठा और स्लम बस्ती में कैंप लगा टीकाकरण किया जा रहा है. जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ आरपी सिंह ने बताया कि जो बच्चे टीकाकरण से वंचित हैं, उनके लिए यह जानलेवा हो सकता है.
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े पर नजर डालें तो जिले में जेई से 23 और मिजिल्स से 25 प्रतिशत बच्चे अब भी टीकाकरण से वंचित हैं. जिला प्रतिरक्षण कार्यालय से जारी आंकड़ों की मानें, तो वर्ष 2017-18 में एक लाख 41 हजार 203 बच्चों काे जेई का टीका देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था. लेकिन मात्र एक लाख नौ हजार 355 बच्चों को ही प्रतिरक्षित किया गया.
इस तरह 32 हजार बच्चे टीकाकरण से वंचित रह गये, जबकि लक्ष्य के अनुसार सभी बच्चे का टीकाकरण किया जाना था. इसी प्रकार एक लाख 41 हजार 203 बच्चों को मिजिल्स का टीकाकरण का लक्ष्य था, लेकिन मात्र एक लाख पांच हजार 450 बच्चों को ही टीका दिया गया. इसमें भी लगभग 36 हजार बच्चे टीकाकरण से वंचित रह गये.