देल्हों दोहरे हत्याकांड में नामजद अभियुक्त रंजेश गिरफ्तार

मुजफ्फरपुर : नगर निगम में अब कर्मचारी व निगम के अधिकारी आमने-सामने आ गये हैं. बुधवार को उप नगर आयुक्त रणधीर लाल ने टैक्स दारोगा उमेश गुप्ता पर विज्ञापन से संबंधित संचिका जबरन छीनने व हाथापाई करने का आरोप लगाया है. इस बाबत उन्होंने लिखित शिकायत नगर आयुक्त, अपर नगर आयुक्त, मेयर व उप मेयर […]

मुजफ्फरपुर : नगर निगम में अब कर्मचारी व निगम के अधिकारी आमने-सामने आ गये हैं. बुधवार को उप नगर आयुक्त रणधीर लाल ने टैक्स दारोगा उमेश गुप्ता पर विज्ञापन से संबंधित संचिका जबरन छीनने व हाथापाई करने का आरोप लगाया है. इस बाबत उन्होंने लिखित शिकायत नगर आयुक्त, अपर नगर आयुक्त, मेयर व उप मेयर से की है.
उप नगर आयुक्त ने भविष्य में जान-माल के नुकसान का अंदेशा जताते हुए सुरक्षा की गुहार लगायी है. हालांकि, नगर आयुक्त के अचानक छुट्टी में चले जाने पर मामले पर कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है. इधर, इस घटना के बाद अन्य उप नगर अायुक्त समेत
अन्य पदाधिकारियों में भय का माहौल है. बताया जाता है कि हाल में जो नये पदाधिकारी आये हैं, वे सभी सामूहिक रूप से सरकार को पत्र लिख यहां से तबादले की मांग कर सकते हैं.
इधर, मेयर ने सीएम व प्रधान सचिव को पत्र लिख घटना से कराया अवगत : दूसरी ओर, मेयर सुरेश कुमार को जब उप नगर आयुक्त ने मामले से अवगत कराया, तो उन्होंने एक्शन लेते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार व प्रधान सचिव चैतन्य प्रसाद को पत्र लिखा.
इसमें नगर आयुक्त संजय दूबे पर साजिश के तहत विज्ञापन के टेंडर में हुई वित्तीय अनियमितता को छिपाने के उद्देश्य से उप नगर आयुक्त के साथ हाथापाई कराने की शिकायत की है. कहा, विज्ञापन के टेंडर में नगर आयुक्त ने बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ी की है.
इसकी जांच के लिए मैंने उप नगर आयुक्त रणधीर लाल को निर्देश दिया था. वे लेखा शाखा से संचिका लेकर अध्ययन के लिए अपने पास रखे थे. नगर आयुक्त को भनक लगने पर टैक्स दाराेगा को भेज इस तरह की घटना करायी है. मुख्यमंत्री व प्रधान सचिव से उच्च स्तरीय जांच करा नगर आयुक्त के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है.
संचिका नहीं उपलब्ध कराने पर गहराया शक
मेयर ने कहा कि उन्हें टेंडर में गड़बड़ी की शिकायत मिली. इसके बाद उन्होंने संचिका की मांग विज्ञापन शाखा से की थी, लेकिन संचिका उन्हें उपलब्ध नहीं करायी गयी. नगर आयुक्त लगभग 15 दिनों तक संचिका अपने पास रखे रह गये.
बाद में सशक्त स्थायी समिति की मीटिंग में संचिका को सुधार कर नगर आयुक्त ने खुद प्रस्तुत किया, लेकिन दोबारा जब 12.60 लाख की राशि जमा हुई और संचिका मांगने पर टाल-मटोल की गयी, तो इसके बाद गड़बड़ी की आशंका और गहरा गयी.
मुझे नगर आयुक्त ने संचिका लेने का आदेश दिया था. इसी के तहत मैं उप नगर आयुक्त से संचिका मांगने गया था. हाथापाई का आरोप गलत है.
उमेश कुमार गुप्ता, टैक्स दारोगा
मेरे ऑफिस पहुंचने के साथ टैक्स दारोगा ने संचिका देने को कहा. मैं जब संचिका को अलमारी से निकाल उसे देखने लगा, तो टैक्स दारोगा ने बदतमीजी के साथ हाथापाई कर संचिका छीनने का प्रयास किया.
रणधीर लाल, उप नगर आयुक्त
मुझे नगर आयुक्त ने संचिका लेने का आदेश दिया था. इसी के तहत मैं उप नगर आयुक्त से संचिका मांगने गया था. हाथापाई का आरोप गलत है.
उमेश कुमार गुप्ता, टैक्स दारोगा
मेरे ऑफिस पहुंचने के साथ टैक्स दारोगा ने संचिका देने को कहा. मैं जब संचिका को अलमारी से निकाल उसे देखने लगा, तो टैक्स दारोगा ने बदतमीजी के साथ हाथापाई कर संचिका छीनने का प्रयास किया.
रणधीर लाल, उप नगर आयुक्त
मार्च के बदले 31 अगस्त तक का है टेंडर
मेयर ने सीएम व प्रधान सचिव को जो पत्र लिखा है, इसमें विज्ञापन के टेंडर में कैसे नियम को ताक पर रखा गया है, इसका विस्तृत जिक्र किया है. कहा है कि किसी भी चीज का टेंडर सरकार के नियम के अनुसार वित्तीय वर्ष 01 अप्रैल से 31 मार्च तक होता है, लेकिन नगर आयुक्त ने सभी नियम को ताक पर रख टेंडर अवधि 31 अगस्त 2019 तक निर्धारित कर दी.
टेंडर की राशि एक मुश्त ली जानी थी, जिसे इन्होंने चार किश्त में कर दिया. इसके अलावा जीएसटी की राशि में भी उस वक्त छूट दी गयी. मेयर ने कहा कि जब वे सवाल खड़ा किया, तब 11 मार्च को आनन-फानन में विज्ञापन का टेंडर लिये एजेंसी से 12.60 लाख का चेक से राशि जमा कराया. बताया जाता है कि यह राशि जीएसटी की है.

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