कुलपति व एसडीओ ने अनशनकारी छात्रों को जूस पिलाया
मुजफ्फरपुर : बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन में चल रहा बीएड छात्रों का अनशन सातवें दिन गुरुवार को टूट गया. डीएम के हस्तक्षेप के बाद मामले का समाधान हुआ. बीएड कॉलेजों के फीस निर्धारण के संबंध में विवि प्रशासन ने 10 दिनों में जांच कर निर्णय लेने का आश्वासन दिया, जिस पर छात्र अनशन तोड़ने को तैयार हो गये. दोपहर में एसडीओ डॉ कुंदन कुमार के साथ ही कुलपति डॉ अमरेंद्र नारायण यादव, कुलसचिव कर्नल अजय कुमार राय व प्रॉक्टर डॉ विवेकानंद शुक्ला पहुंचे और अनशनकारियों को जूस पिला कर अनशन खत्म कराया.
इससे पहले सुबह करीब 10 बजे डीएम के चेंबर में कुलपति, कुलसचिव व अनशनकारी छात्रों के प्रतिनिधियों के साथ बीएड कॉलेज संघ के प्रतिनिधियों की बैठक हुई. इसमें हाईकोर्ट के आदेश पर चर्चा हुई. इसके बाद निर्णय लिया गया कि कॉलेजों के इंफ्रास्ट्रक्चर की जांच के बाद फीस तय की जायेगी. कुलसचिव की ओर से जांच के लिए नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया. यह भी कहा गया है कि जबतक जांच रिपोर्ट नहीं आ जाती, बीएड छात्रों पर फीस जमा करने के लिए काेई दबाव नहीं बनाया जायेगा.
26 से अनशन पर बैठे थे आठ छात्र :बिहार विवि बीएड छात्राध्यापक संघ के आह्वान पर 26 अक्तूबर से बीएड के आठ छात्र अनशन पर बैठे थे. वे बीच सत्र में डेढ़ लाख रुपये बीएड का कोर्स फीस किये जाने का विरोध करते हुए फीस वृद्धि वापस लेने की मांग पर अड़े थे. अनशनकारी आशुतोष कुमार, हिमांशु कुमार, नीरज चौहान, रत्नेश कुमार रजक, सीमांत कुमार गौतम, अवकाश कुमार विक्की, मानवेंद्र कुमार मन्नू व मनीष कुमार के समर्थन में रोजाना देर शाम तक दर्जनों छात्र-छात्राओं की भीड़ विवि परिसर में जुटती थी.
अनशन तोड़वाने को 24 घंटे चली कसरत
छात्रों का अनशन खत्म कराने में प्रशासन को 24 घंटे लग गये. बुधवार की सुबह एसडीओ, सिटी एसपी व नगर डीएसपी ने अनशनकारियों से वार्ता के बाद बीएड कॉलेजों की बैठक बुलाने को कहा था. शाम को एसडीओ व नगर डीएसपी दुबारा विवि पहुंचे और बैठक की, लेकिन नतीजा नहीं निकल सका. सुबह डीएम ने विवि के अधिकारी व बीएड कॉलेज संघ के पदाधिकारियों की बैठक अपने चेंबर में बुलाई और खुद हस्तक्षेप कर समाधान निकाला.
फीस कम नहीं होने पर मायूस दिखे छात्र
छह दिनों तक चले अनशन के बाद जो नतीजा निकला, उससे अधिकतर छात्र मायूस दिखे. जांच के नाम पर मामले को 10 दिन और लटका दिया गया. दोपहर करीब एक बजे विवि के अधिकारी अनशन स्थल पर पहुंचे, तो छात्रों के बीच सुगबुगाहट शुरू हो गयी थी. अधिकारियों के लौटने के बाद इस बात की ही चर्चा रही कि आंदोलन का नतीजा क्या निकला. छात्रों का कहना था कि 1100 रुपये का परीक्षा फॉर्म के लिए चार से पांच हजार वसूला होता है.
जांच के नाम पर डॉक्टरों ने की औपचारिकता
अनशनकारियाें की जांच के नाम पर डॉक्टरों ने केवल औपचारिकता निभायी. जब हालत बिगड़ी, तो अनशन स्थल पर ही पानी का बोतल लटका दिया. ज्यादा तबीयत खराब होने पर अस्पताल लेते गये. वहां से सामान्य हालत होने पर छुट्टी दे दी. सात दिनों के अनशन के बाद सभी छात्रों का वजन चार से पांच किलो तक कम हो गया है. वहीं ब्लड प्रेशर में भी उतार-चढ़ाव होता रहा. हालांकि इसका रिकॉर्ड अनशनकारियों के पास नहीं है.
