मुजफ्फरपुर : राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने ऑपरेशन भूमि दखलदहानी के तहत परचा वाली जमीन पर कब्जा-दखल दिलाने के लिए योजना चलायी थी, लेकिन यह खानापूर्ति बन कर रह गयी है. पर्चाधारियों को पर्चा वाली जमीन पर कब्जा-दखल अबतक नहीं दिलाये जाने के कारण विभाग को ऑपरेशन भूमि दखल-दहानी की अवधि में विस्तार करना पड़ा है.
सितंबर 2014 में राज्य भर में ऑपरेशन भूमि दखलदहानी के नाम से बेदखल पर्चाधारियों को उन्हें आवंटित भूमि पर दखल-कब्जा दिलाने के उद्देश्य से यह महत्वाकांक्षी योजना चलायी जा रही है. ऑपरेशन भूमि दखल-दहानी के तहत शत-प्रतिशत लक्ष्य की प्राप्ति के लिए 30 जून 2018 तक विस्तारित किया गया था.
इस संबंध में सरकार के विशेष सचिव ने विस्तारित अवधि तक शत-प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त करने के लिए पंचायत व प्रखंड स्तर पर शिविर लगाने का निर्देश दिया था. बेदखल हुए पर्चाधारियों को चिह्नित करते हुए पूर्व में निर्गत दिशा-निर्देशों के अनुसार आवंटित भूमि पर दखल दिलाते हुए वेबसाइट पर अपलोड करना था.
लेकिन जिले में यह योजना कछुए की गति से चल रही है. लक्ष्य के 25 प्रतिशत पर्चाधारी को कब्जा कायम नहीं हुआ है. दो हजार से अधिक मामले लंबित हैं. सबसे अधिक मामले मुशहरी, कांटी, कुढ़नी, सरैया में हैं. हर महीना-दो महीना पर पर्चाधारी जमीन पर कब्जा के लिए प्रखंड से लेकर जिला मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन करते हैं.
दखल-कब्जा को लेकर होता है टकराव
पर्चावाली जमीन पर दखल-कब्जा को लेकर अक्सर टकराव की स्थिति हो जाती है. भूदान या सीलिंग वाली जमीन का काटे गये परचा पर कब्जा में जमीन मालिक की आपत्ति होती है. बताया जाता है कि भू- दान व सिलिंग वाली जमीन का परचा काटने में पूरी प्रक्रिया नहीं की गयी है. इसी वजह से भूस्वामी जमीन पर कब्जा जमाये हैं. परचा काटने के बाद भी भू-स्वामी की जमाबंदी से जमीन को हटाया नहीं गया है.
