कायम रहेंगी सूफी-नातिया कव्वाली पार्श्व गायक अल्ताफ राजा से विशेष बातचीत
मुजफ्फरपुर : कव्वाली में शास्त्रीयता है, इस कारण फिल्मी संगीत में इसका क्रेज बढ़ा है. आज हर फिल्मकार इसकी शास्त्रीयता का उपयोग कर रहा है. यह ऐसी परंपरा है, जो हमेशा कायम रहेगी. सूफी व नातिया कव्वाली का दौर कभी समाप्त नहीं होने वाला. उक्त बातें पार्श्वगायक अल्ताफ राजा ने कही. वे अररिया से कार्यक्रम […]
मुजफ्फरपुर : कव्वाली में शास्त्रीयता है, इस कारण फिल्मी संगीत में इसका क्रेज बढ़ा है. आज हर फिल्मकार इसकी शास्त्रीयता का उपयोग कर रहा है. यह ऐसी परंपरा है, जो हमेशा कायम रहेगी. सूफी व नातिया कव्वाली का दौर कभी समाप्त नहीं होने वाला. उक्त बातें पार्श्वगायक अल्ताफ राजा ने कही. वे अररिया से कार्यक्रम कर लौटने के क्रम में सोमवार को कुछ देर के लिए शहर में ठहरे थे. माड़ीपुर स्थित होटल सिमना में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि तुम तो ठहरे परदेशी अलबम से मेरी पहचान बनी. मैंने इसके लिए काफी मेहनत की थी. मैं लोगों को अच्छा संगीत देना चाहता था,
लेकिन मुझे यह नहीं पता था कि लोग इस संगीत को इतना पसंद करेंगे. इसके बाद शपथ फिल्म में मुझे एक गीत प्यार और इश्क का मजा लीजिये, गाने का मौका मिला. यह गीत भी काफी हिट रहा. इसके बाद से गाने का दौर चलता रहा. उन्हाेंने कहा कि हिंदी व बंग्ला में मैंने कई गीत गाये हैं, लेकिन भोजपुरी से परहेज करता हूं, उसमें डबल मीनिंग के शब्द अधिक होते हैं. गजल व कव्वाली गायकी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि कव्वाल गजल व गीत गा सकता है,
लेकिन गजल गायक कव्वाली नहीं गा सकता. कव्वाली उन्हें विरासत में मिली है, इसलिए वे इसके अलावा गीत व गजल भी गा रहे हैं. अल्ताफ ने कहा कि जल्द ही फिल्म दुलहन हैदराबादी रिलीज होने वाली है, जिसमें उन्होंने एक गीत गाया है, इसका धुन काफी बेहतर है. उन्होंने कहा, मुजफ्फरपुर के लोग संगीत के काफी प्रेमी हैं.
