अक्षय नवमी पर आंवला वृक्ष की पूजा करने से भगवान विष्णु व मां लक्ष्मी का मिलता है आशीर्वाद

भारतीय संस्कृति में विभिन्न अवसरों पर मनाये जाने वाले त्योहार त्योहार धार्मिक दृष्टिकोण के साथ-साथ पारिवारिक, सामाजिक, स्वस्थ्य जीवन, सांस्कृतिक चेतना, प्रकृति प्रेम एवं पर्यावरण से हमें जोड़ता है

मुंगेर भारतीय संस्कृति में विभिन्न अवसरों पर मनाये जाने वाले त्योहार त्योहार धार्मिक दृष्टिकोण के साथ-साथ पारिवारिक, सामाजिक, स्वस्थ्य जीवन, सांस्कृतिक चेतना, प्रकृति प्रेम एवं पर्यावरण से हमें जोड़ता है. जिससे हमारा जीवन खुशहाल बनता है. कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को आंवला नवमी या अक्षय नवमी के रूप में मनाया जाता है. इस त्योहार में भगवान विष्णु एवं माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना की जाती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कार्तिक माह के नवमी तिथि को भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष पूजा करने से जीवन में सौभाग्य, धन और सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है. आंवला के वृक्ष को भगवान विष्णु का स्वरूप माना गया है. इसलिए मान्यता है कि आंवला वृक्ष की पूजा से सब पाप नष्ट हो जाते हैं. इस त्योहार में आंवला वृक्ष के नीचे प्रसाद रूपी भोजन बनाकर व वृक्ष के नीचे बैठकर भोजन करने से भगवान विष्णु और सभी देवताओं का आशीर्वाद मिलता है. इससे घर में शांति, एकता और सौभाग्य बढता है. आंवला पेड़ की पूजा के साथ-साथ आंवला का सेवन एवं इससे बनने वाली खाद्य सामग्रियों का सेवन करना बहुत महत्वपूर्ण माना गया है. पंडित कौशल किशोर पाठक कहते हैं कि कार्तिक मास के अंत तक ऋतु परिवर्तन की शुरुआत होती है और दिल, पेट और स्क्रीन से संबंधित परेशानियां बढ़ती है. इसलिए आंवला का सेवन दिल की बीमारी, डाइजेशन और स्किन हेल्थ को बनाए रखने में मददगार होता है. इससे लीवर और किडनी की सफाई होती है. साथ ही शरीर से जहरीले टॉक्सिन बाहर निकलते हैं, ये मेटाबालिज्म को भी बढाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन कूष्मांड दान के साथ-साथ अन्नदान का बड़ा महत्व है. इससे अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है.

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By ANAND KUMAR

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