सड़कों पर वाहन पार्किंग से जाम की समस्या

सड़कों पर वाहन पार्किंग से जाम की समस्या

मुंगेर. मुंगेर एक ऐसा शहर है जहां ई-रिक्शा व ऑटो बिना परमिट व बिना किराये निर्धारण के ही सड़कों पर दौड़ा रही हैं. टोटो पर चढ़ने वालों को हर मोड़ तक जाने के लिए 10 रुपये और टेंपू पर कहीं चढ़िये और कहीं उतरिये उसके लिए 10 या 20 रुपये किराया चुकाना पड़ रहा है. हद यह है कि ऑटो के लिए स्टैंड तो है, लेकिन खुलती सड़क पर से है. जबकि टोटो के लिए तो यहां स्टैंड की ही कोई व्यवस्था नहीं है. इसके कारण शहर जाम की समस्या से कराह रहा है.

सड़कों से ही होता है ऑटो का परिचालन, लगता है जाम

ऑटो के लिए प्राइवेट टैक्सी स्टैंड हैं, लेकिन ऑटो स्टैंड से नहीं, बल्कि सड़कों से ही परिचालन होता है. मानों सड़क ही इसके लिए स्टैंड है. स्टैंड के सामने, एक नंबर ट्रैफिक के इर्द-गिर्द, सितारिया चौक, भगत सिंह चौक, कौड़ा मैदान सभी जगह आपको एक-दो नहीं, बल्कि आधा दर्जन से अधिक ऑटो सड़कों पर दिख जाएंगे. पूरबसराय अंडर ब्रिज के पास से स्थायी रूप से ऑटो वालों ने स्टैंड बना लिया है. अधिकांश ऑटो चालकों के पास लाइसेंस नहीं है. हद तो यह है कि कहीं उतरिये कहीं चढ़िये किराया 10 या 20 रुपये ही देना पड़ता है.

न रूट तय न स्टैंड का पता; लग रहा जाम

पिछले पांच वर्षों में ई-रिक्शा की संख्या में बेतहाशा वृद्धि हुई है. लेकिन जिम्मेदारों ने न तो आज तक ई-रिक्शा के लिए रूट तय किया और न ही इनके लिए कोई स्टैंड बनाया है. इस कारण ई-रिक्शा शहर में जाम की वजह बन गयी है. शहर के मुख्य मागों पर झुंड बनाकर ई-रिक्शा दौड़ता जा रहा है. इससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है. जबकि ऑटो रिक्शा विनियमन योजना में ई-रिक्शा के लिए भी रूट व स्टैंड होना अनिवार्य है. लेकिन नियमों को ताक पर रख कर मुंगेर की सड़कों पर ई-रिक्शा का परिचालन हो रहा है. लगातार इनकी संख्या में इजाफा ही हो रहा है. इतना ही नहीं मुंगेर-जमालपुर व मुंगेर-सीताकुंड मार्ग में चलने वाले टेंपू चालकों की मनमानी कम नहीं है. उसने शहर के चौक-चौराहों और पूरबसराय अंडर ब्रिज के पास अनधिकृत स्टैंड बना डाला है. इससे राहगीरों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.

सुगम यातायात के बदले लोगों के लिए बना सर दर्द

यात्री परिवहन के लिए ये सबसे सस्ते साधन के तौर पर देखा जा रहा है, लेकिन वर्तमान में यह सुगम यातायात के बदले लोगों के लिए सिर दर्द साबित हो रहा है. क्योंकि जहां मन होता है, वहीं पर ई-रिक्शा को रोक कर सवारी बैठाने का सिलसिला शुरू हो जाता है. विदित हो कि पिछले वर्ष ही पूर्व ध्वस्त होती ट्रैफिक व्यवस्था को देखते हुए सरकारी बस स्टैंड में ई-रिक्शा के लिए ठहराव की व्यवस्था की गयी थी. जबकि शहर में एक नंबर ट्रैफिक से गांधी चौक के बीच ई-रिक्शा के परिचालन पर प्रतिबंध लगाया गया था. 10 दिनों में ही यह व्यवस्था ध्वस्त हो गयी और ई-रिक्शा चालकों की मनमानी शहर की सड़कों पर जारी हो गयी थी, जो आज भी जारी है.

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Author: RANA GAURI SHAN

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