असरगंज आचार्य शिवम मिश्रा ने भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह प्रसंग का वर्णन किया. उन्होंने बताया कि यह प्रसंग भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा की महानता को दर्शाता है. साथ ही जीवन के गूढ़ सत्य और संतुलन का प्रेरणादायक संदेश देता है. वे रविवार को असरगंज जलालाबाद स्थित राजबनेली दुर्गा मंदिर में श्रद्धालुओं को आकर्षक झांकी के माध्यम से संदेश देते हुए कही. आचार्य मिश्रा ने माता पार्वती की कठोर तपस्या का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए पार्वती द्वारा की गई यह तपस्या भारतीय नारी की श्रद्धा, संयम और अटूट विश्वास का अनुपम उदाहरण है. उनके तप, त्याग और समर्पण से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें स्वीकार किया, जिसके बाद यह दिव्य विवाह संपन्न हुआ. इस अलौकिक विवाह के साक्षी देवता, ऋषि, गंधर्व और स्वयं प्रकृति बनीं. भगवान शिव की बारात अपने आप में अनोखी थी. जिसमें भूत-प्रेत, योगी और गण शामिल थे. आचार्य ने बताया कि यह बारात संदेश देती है कि सच्चा सौंदर्य बाहरी आडंबर में नहीं, बल्कि आत्मिक गुणों में निहित होता है. यह विवाह सामान्य सांसारिक मान्यताओं से भिन्न होते हुए भी गहन आध्यात्मिक अर्थ समेटे हुए है. शिव-पार्वती विवाह यह सिखाता है कि तपस्या और गृहस्थ जीवन में कोई विरोध नहीं, बल्कि दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं. इन्हीं गुणों के बल पर हर लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है. भारतीय समाज में शिव-पार्वती का दांपत्य आदर्श वैवाहिक जीवन और आध्यात्मिक एकता का प्रतीक माना जाता है. मौके पर सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद थे.
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