बीआरएम कॉलेज में छात्राओं का हल्ला बोल: बंद पैड मशीन और गंदे टॉयलेट पर फूटा गुस्सा, प्राचार्या को 30 दिन की मोहलत

बीआरएम कॉलेज की छात्राओं ने प्राचार्य को 13 सूत्री मांगों का ज्ञापन सौंपा. प्राध्यापकों की कमी, पेयजल, शौचालय, कैंटीन समेत कई मुद्दों पर ध्यान देने का आग्रह. कार्रवाई न होने पर आंदोलन की चेतावनी.

Munger News: जब देश की बेटियां उच्च शिक्षा की दहलीज पर कदम रखती हैं, तो वे एक सुरक्षित, स्वच्छ और समृद्ध शैक्षणिक माहौल की उम्मीद करती हैं. लेकिन मुंगेर के प्रतिष्ठित बीआरएम कॉलेज की छात्राओं को हर दिन बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है. कभी बंद पड़ी सेनेटरी पैड वेंडिंग मशीन, तो कभी बदबूदार शौचालय और कक्षाओं में शिक्षकों का अकाल. छात्राओं के सब्र का बांध सोमवार को आखिरकार टूट गया. अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के बैनर तले एकजुट होकर छात्राओं ने कॉलेज प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और प्रभारी प्राचार्या को 13 सूत्री मांगों का अल्टीमेटम थमा दिया.

बंद पैड वेंडिंग मशीन से गंदे शौचालय तक: बुनियादी सुविधाओं को तरसती छात्राएं

बीआरएम कॉलेज इकाई की अध्यक्ष कविता कुमारी के नेतृत्व में जब छात्राओं का प्रतिनिधिमंडल प्रभारी प्राचार्या डॉ वंदना कुमारी के चैंबर में पहुंचा, तो कॉलेज परिसर के भीतर की जमीनी हकीकत उजागर हो गई. छात्राओं ने दर्द साझा करते हुए बताया कि गर्ल्स कॉलेज होने के बावजूद यहां छात्राओं के स्वास्थ्य और स्वच्छता से जुड़ी सुविधाओं की हालत बेहद दयनीय है. कॉलेज में लगी सेनेटरी पैड वेंडिंग मशीन महीनों से धूल फांक रही है और बंद पड़ी है. शौचालयों की नियमित मरम्मत और सफाई न होने से बीमारियां फैलने का डर बना रहता है. इतना ही नहीं, गर्ल्स कॉमन रूम की हालत भी इतनी खराब है कि छात्राएं वहां बैठकर आराम तक नहीं कर सकती हैं. पीने के शुद्ध पानी के लिए भी छात्राओं को भटकना पड़ता है.

शिक्षकों की कमी और फीस के नाम पर वसूली का आरोप: 13 मांगों में छिपी जमीनी हकीकत

छात्राओं द्वारा सौंपे गए 13 सूत्री मांग पत्र में केवल बुनियादी सुविधाएं ही नहीं, बल्कि कॉलेज के शैक्षणिक माहौल और वित्तीय पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं. ज्ञापन के जरिए मांग की गई है कि कॉलेज में नियमित और गुणवत्तापूर्ण पठन-पाठन सुनिश्चित करने के लिए शिक्षकों की भारी कमी को तुरंत दूर किया जाए. पुस्तकालय को व्यवस्थित कर सुसज्जित किया जाए और बंद पड़े सीसीटीवी कैमरों को ठीक कराकर छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए. इसके अलावा, खेल मैदान के रखरखाव, एनएसएस व एनसीसी को सक्रिय करने तथा कैंटीन में रेट चार्ट सार्वजनिक करने की बात कही गई है. छात्राओं ने सबसे अहम मुद्दा उठाते हुए कहा कि नामांकन फॉर्म के नाम पर ली जा रही फीस की नियमानुसार समीक्षा की जाए और यदि फीस नियमों के विपरीत ली जा रही है, तो उसे तत्काल समाप्त कर छात्राओं को आर्थिक राहत प्रदान की जाए.

30 दिनों की मोहलत और उग्र आंदोलन की चेतावनी

छात्राओं ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि महाविद्यालय में विद्यार्थियों को पारदर्शी, स्वच्छ और बेहतर शैक्षणिक वातावरण देना कॉलेज प्रशासन की नैतिक और प्राथमिक जिम्मेदारी है. कॉलेज अध्यक्ष कविता कुमारी ने कहा कि छात्राएं जिन समस्याओं को झेल रही हैं, उनका समयबद्ध और प्रभावी समाधान होना बेहद जरूरी है. छात्राओं ने कॉलेज प्रशासन को 30 दिनों के भीतर इन सभी 13 मांगों पर ठोस और धरातलीय कार्रवाई करने का समय दिया है. उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर अपेक्षित सुधार नहीं हुआ, तो अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद छात्रहित में उग्र, लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण आंदोलन शुरू करने के लिए बाध्य होगी.

Munger News: छात्राओं के समर्थन में उतरा छात्र संगठन, जानिए आगे की स्थिति

ज्ञापन सौंपने के दौरान एबीवीपी के प्रांतीय और जिला स्तर के पदाधिकारी भी छात्राओं के समर्थन में मुस्तैद रहे. प्रदेश कार्यसमिति सदस्य सन्नी कुमार, विभाग संयोजक कुणाल राज, जिला संयोजक सचिन कुमार और कॉलेज सचिव भावना कुमारी सहित ऋतिक कुमार, सिंटू, रितिका, रिमझिम, नीलू, नैना, कायनात, श्रुति और हैप्पी राज जैसे कई कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में छात्राएं मौके पर मौजूद रहीं. इस पूरे घटनाक्रम ने मुंगेर के शैक्षणिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है. कॉलेज की छात्राओं को अब इंतजार है कि प्रशासन कब तक इन बुनियादी समस्याओं से उन्हें निजात दिलाता है. अगर 30 दिनों में सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में कॉलेज परिसर में बड़ा छात्र आंदोलन देखने को मिल सकता है.

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By अमित झा

अमित झा प्रिंट माध्यम में 06 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. सामाजिक कार्यों, शिक्षा, राजनीति व खेल में रुचि रखते हैं.

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