नगर के मारवाड़ी टोला स्थित प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय में सोमवार शाम अलौकिक रक्षाबंधन उत्सव का आयोजन किया गया. केंद्र की संचालिका बीके स्नेहा दीदी के संयोजन और मार्गदर्शन में हुए कार्यक्रम में भागलपुर की मुख्य संचालिका राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी अनिता दीदी मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुईं. उन्होंने रक्षाबंधन की आध्यात्मिक महत्ता, पवित्र रिश्तों और जीवन में ईश्वरीय ज्ञान की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला.
पवित्रता, प्रेम और सुरक्षा का संकल्प है रक्षाबंधन
राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी अनिता दीदी ने कहा कि रक्षाबंधन केवल राखी बांधने का पर्व नहीं, बल्कि पवित्रता, प्रेम और सुरक्षा के संकल्प को जीवन में उतारने का अवसर है. उन्होंने कहा कि राजयोग मेडिटेशन के माध्यम से व्यक्ति अपनी आंतरिक शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ा सकता है.
उन्होंने लोगों को नियमित राजयोग और आध्यात्मिक चिंतन के माध्यम से तनावमुक्त एवं श्रेष्ठ जीवन जीने के लिए प्रेरित किया.
आत्मिक रिश्तों को मजबूत करने का संदेश
बीके स्नेहा दीदी ने कहा कि रक्षाबंधन भाई-बहन के स्नेह का पर्व होने के साथ आत्मिक भाई-बहन के बीच पवित्र बंधन, सम्मान, सुरक्षा और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक भी है.
उन्होंने कहा कि वर्तमान जीवनशैली में तनाव और नकारात्मकता बढ़ रही है. ऐसे में ईश्वरीय ज्ञान और राजयोग को जीवन का हिस्सा बनाकर मन को शांत और जीवन को संस्कारित बनाया जा सकता है. उन्होंने लोगों से आध्यात्मिक मूल्यों को अपनाने की अपील की.
बच्चों की प्रस्तुति ने बांधा समां
कार्यक्रम में मधुर गीत, आध्यात्मिक अनुभव और प्रवचन के माध्यम से उपस्थित लोगों को सकारात्मक एवं आध्यात्मिक जीवन अपनाने के लिए प्रेरित किया गया. वहीं माइको डांस एकेडमी के बच्चों ने नृत्य प्रस्तुति के माध्यम से भाई-बहन के पवित्र प्रेम और भावनात्मक रिश्ते को खूबसूरती से प्रस्तुत किया.
बच्चों की प्रस्तुति ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों का मन मोह लिया और पूरा माहौल आध्यात्मिकता के साथ भावनात्मक रंग में रंग गया.
प्रबुद्धजनों की रही मौजूदगी
कार्यक्रम में शिवशंकर सिंह, प्रभाकर सिंह, प्रणव कुमार सिट्टू, कृष्णानंद चौधरी, सतीरमन सिंह, राकेश चंद्र सिन्हा, राजीव रंजन, संजीव चंद्र झा, बीके लाडली, राखी कुमारी केशरी, श्वेता कुमारी, रजनी केशरी, पुरुषोत्तम गुप्ता, शिवम, पीयूष और धनिक साह समेत अनेक प्रबुद्धजन मौजूद रहे.
कार्यक्रम के माध्यम से रक्षाबंधन को केवल सामाजिक परंपरा के रूप में नहीं, बल्कि आत्मिक शुद्धता, सकारात्मक सोच और मानवीय रिश्तों को मजबूत करने वाले पर्व के रूप में मनाने का संदेश दिया गया.
