Munger SNCU Death Report : सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए लगातार करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन मुंगेर सदर अस्पताल के विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (एसएनसीयू) के ताजा आंकड़े कई गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं. अस्पताल के रिकॉर्ड के अनुसार अप्रैल से जून 2026 के बीच एसएनसीयू में कुल 315 नवजातों को भर्ती किया गया, जिनमें से 28 की इलाज के दौरान मौत हो गई. यानी महज तीन महीने में लगभग 9 प्रतिशत नवजात अपनी जिंदगी की जंग हार गए.
गंभीर बीमार नवजातों का होता है इलाज
एसएनसीयू वार्ड में उन नवजातों को भर्ती किया जाता है जो जन्म के समय कम वजन, सांस लेने में तकलीफ, संक्रमण, अत्यधिक पीलिया, दूध नहीं पी पाने या अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे होते हैं. मुंगेर जिले में यह 20 वॉर्मर बेड वाला एकमात्र विशेष केंद्र है, जहां ऐसे बच्चों का इलाज किया जाता है.
अस्पताल के आंकड़ों के अनुसार अप्रैल में 107 नवजात भर्ती हुए, जिनमें 10 की मौत हुई. मई में 96 नवजातों में 7 और जून में 112 नवजातों में 11 की मौत दर्ज की गई. जून का आंकड़ा सबसे अधिक चिंताजनक रहा.
पिछले वित्तीय वर्ष में भी नहीं बदली तस्वीर
स्थिति केवल इस वर्ष तक सीमित नहीं है. वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान एसएनसीयू में कुल 1,144 नवजात भर्ती किए गए थे, जिनमें 87 नवजातों की मौत हो गई थी. यह मृत्यु दर करीब 7.5 प्रतिशत रही. यदि पूरे वर्ष का औसत देखा जाए तो हर महीने करीब 95 नवजात भर्ती हुए और औसतन सात बच्चों की जान नहीं बचाई जा सकी.
सुविधाएं पूरी, फिर भी क्यों नहीं बच रही जान?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि अत्याधुनिक उपकरणों, पर्याप्त चिकित्सकों और प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों से लैस एसएनसीयू वार्ड में भी मृत्यु दर चिंताजनक क्यों बनी हुई है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर गर्भावस्था की जांच, सुरक्षित प्रसव, जन्म के तुरंत बाद उचित देखभाल और रेफरल सिस्टम को और मजबूत बनाने की जरूरत है.
क्या बोले सिविल सर्जन
सिविल सर्जन डॉ. राजू ने बताया कि एसएनसीयू में पर्याप्त डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी तैनात हैं तथा सभी नवजातों का बेहतर इलाज किया जाता है. उन्होंने कहा कि कई मामलों में गर्भावस्था के दौरान माताओं की स्वास्थ्य संबंधी लापरवाही या पहले से मौजूद जटिलताओं के कारण नवजात गंभीर स्थिति में अस्पताल पहुंचते हैं, जिससे मृत्यु का जोखिम बढ़ जाता है. उन्होंने बताया कि ऐसे मामलों की लगातार समीक्षा की जा रही है और मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को और प्रभावी बनाने पर काम किया जा रहा है.
