मुंगेर —————— मुंगेर विश्वविद्यालय के सीनेटर डॉ कुंदनलाल जहां विश्वविद्यालय के शैक्षणिक व गैर शैक्षणिक कार्यों को लेकर लगातार विश्वविद्यालय पर कई गंभीर आरोप लगा चुके हैं. वही अब उनके द्वारा कुलपति को ज्ञापन देकर कुलसचिव पर सेवांत लाभ को लेकर शिथिलता बरतने का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा है कि बिहार सरकार के वित्त विभाग ने भी अपने कई संकल्पों के तहत यह निर्देशित किया है कि किसी भी सरकारी कर्मी को उनकी सेवानिवृत्ति की तिथि पर ही उपादान, जीपीएफ, उपार्जित अवकाश की कुल उपार्जिन राशि और प्रोविजनल पेंशन की स्वीकृति हो जानी चाहिए. इसे लेकर बार बार विश्वविद्यालय को त्वरित कार्रवाई करने का निर्देश दिया जाता रहा है, लेकिन वर्तमान कुलसचिव के कार्यकाल में सेवांत लाभ संबंधी संचिकाएं बिलकुल गतिहीन हो गयी हैं. हालांकि विश्वविद्यालय अंतर्गत एक खास महाविद्यालय के सेवानिवृत्त प्रभारी प्राचार्य की संचिका में अचानक गति आ गयी. जबकि आश्चर्य की बात है कि उक्त प्रभारी प्राचार्य ने अपने वास्तविक सेवानिवृत्ति से ढ़ाई महीने पूर्व ही खुद के लिए उक्त महाविद्यालय से नो ड्यज सर्टिफिकेट खुद के ही हस्ताक्षर से निर्गत भी करा लिया. जिसपर न तो कार्यालय पत्रांक है और न ही निर्गत तिथि, बावजूद कुलसचिव द्वारा उनकी सेवांत लाभ की संचिका को त्वरित गति से पास कर दिया गया. सीनेटर ने कहा कि मुंगेर में ही स्थित एक महाविद्यालय के सेवानिवृत्त प्रभारी प्राचार्य अपनी सेवानिवृत्ति के बाद लगभग प्रतिदिन विश्वविद्यालय मुख्यालय आते दिखते थे, ताकि अपने सेवांत लाभ का प्रसाद प्राप्त कर सकें, परन्तु उनके सेवांत लाभ का भुगतान हुआ नहीं और वे बीमार होकर पटना में अपने आवास पर टकटकी लगाए इंतज़ार कर रहे हैं.
सेवांत लाभ को लेकर अब सीनेटर ने लगाये कुलसचिव पर शिथिलता का आरोप
प्रोविजनल पेंशन की स्वीकृति हो जानी चाहिए.
