मुंगेर साहित्य प्रहरी की मासिक गोष्ठी माधोपुर में एक निजी सभागार में हुआ. जिसकी अध्यक्षता आचार्य नारायण शर्मा ने की ओर संचालन शिवनंदन सलिल ने किया. बैठक में चालू वित्तीय वर्ष के लिए सर्वसम्मति से बजट पारित हुआ और आगामी कार्यक्रमों के बारे में चर्चा हुई कार्यक्रम के प्रथम चरण में राजीव कुमार सिंह ने साहित्य प्रहरी के 35 वर्षीय दीर्घकालिक यात्रा की चर्चा करते हुए कहा कि साहित्य प्रहरी जैसी समृद्ध साहित्यिक संस्था राज्य बिड़ले ही है, जो इस तरह के रचनात्मक कार्य में लगी है. उन्होंने तमाम सक्रिय सदस्यों को धन्यवाद दिया जिनके आर्थिक ओर नैतिक सहयोग से संस्था अनवरत प्रगति के मार्ग पर अग्रसर है. कोषाध्यक्ष ज्योति सिन्हा ने सदस्यों से प्राप्त सहयोग राशि से आय और कुर्सियां , पोडियम, टेबुल आदि समानों पर हुए व्यय का ब्यौरा प्रस्तुत किया और भावी योजना भी प्रस्तुत किया. जिसे सर्वसम्मति से पारित किया गया. साहित्य प्रहरी के संस्थापक सदस्य प्रो जयप्रकाश नारायण ने कहा कि साहित्य प्रहरी ने अपने तत्वावधान में दर्जनों साहित्यिक किताबों का प्रकाशन करके साहित्य को समृद्ध किया है. देश के दर्जनों साहित्यकारों को सम्मानित करने का ऐतिहासिक कार्य किया है, जो भविष्य में भी जारी रहेगा. कवयित्री कुमकुम सिन्हा ने कहा कि साहित्य प्रहरी एक साहित्यक परिवार है. जहां सौहार्द्र और अनुशासन के वातावरण में रचनाकार बहुत कुछ सीखते हैं. संस्था को कुशलतापूर्वक संचालित करने के लिए ज्योति सिन्हा और शिवनंदन सलिल को धन्यवाद दिया. कार्यक्रम के दूसरे चरण में कवि सम्मेलन हुआ. जिसमें सुल्तानगंज गनगनियां के सुरेश सूर्य, इंद्रदेव ओर कैलाश मंडल, सुनील सिन्हा,अलख निरंजन कुशवाहा, खालिद शम्स, रेवाशंकर वामने, श्रेया सोनम, कुमकुम सिन्हा, घनश्याम पोद्दार, प्रतीक कुमार, डॉ रामवरण चौधरी, डॉ रघुनाथ भगत, यदुनंदन झा द्विज, मो हुसैन, ज्योति सिन्हा, शिवनंदन सलिल, रघुनाथ भगत सहित अन्य कवियों ने अपनी-अपनी कविता का पाठ किया.
साहित्य प्रहरी एक साहित्यक परिवार, जहां रचनाकार सीखते है बहुत कुछ
तमाम सक्रिय सदस्यों को धन्यवाद दिया जिनके आर्थिक ओर नैतिक सहयोग से संस्था अनवरत प्रगति के मार्ग पर अग्रसर है.
