बड़े बुजुर्गों का आदर, सम्मान व सत्कर्म करने से दरिद्रता होती है दूर : स्वामी रामभद्राचार्य

श्रद्धालुओं में भक्ति के प्रति नयी ऊर्जा का देखा गया संचार

सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा का पूर्णाहुति के साथ हुआ समापन

हवेली खड़गपुर. नगर के सिंहपुर स्थित नाथ बाबा स्थान में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ सप्ताह का पूर्णाहुति के साथ समापन हो गया. मौके पर समिति के कार्यकर्ताओं को सम्मानित किया गया. वहीं श्रद्धालुओं में भक्ति के प्रति नयी ऊर्जा का संचार देखा गया.

समापन के मौके पर उत्तरकाशी के मर्मज्ञ कथावाचक त्यागी स्वामी रामभद्राचार्य जी महाराज ने कहा कि आज के समय में, जिसमें दोष व्याप्त नहीं है वही सामर्थ्यवान है. उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण को 16108 रानी और पटरानियां थीं और उन्होंने इतने ही रूप प्रकट किये. भगवान को 1 लाख 77 हजार 188 बच्चे हुए. उन्होंने कहा कि किसी की आशा पूर्ण करोगे, तो मन को शांति मिलेगी. जो जितना जिससे आशा रखेगा, वह उतना ही दुखी होगा. मां और पिता के प्रति कर्तव्य का पालन करो. जब कोई न हो अपना राधे-कृष्ण जपा करना. संसार समंदर है. तूफान भी आते हैं, जो प्रभु के सहारे हैं उन्हें आप बचाते हैं. संसार के लोगों से आशा नहीं करें बल्कि भगवान से आशा करें. उन्होंने कहा कि स्वार्थी लोग कभी रिश्ता नहीं निभाते. रिश्ता औकात देखकर नहीं, प्यार देखकर निभाना चाहिए. प्यार से निभाया गया रिश्ता बुढ़ापे तक रहता है. लोग सुविधा को सुख मानते हैं. ऐसे लोग दरिद्र होते हैं. गरीब कभी दरिद्र नहीं होता. दरिद्र वह है जिसके मन में तृष्णा है, संतोष नहीं है. सत्कर्म करो, बड़े बुजुर्गों का आदर सम्मान करो, इससे दरिद्रता दूर होती है. जब तक सुविधा को सुख मानेंगे, कभी सुख नहीं होगा. सुविधा की कोई सीमा नहीं है. मौके पर नंदकिशोर चौधरी, अरुण कुमार साह, शिवशंकर चौधरी, जयमंगल साह, अबोध साह, वीरेंद्र कुमार, टिंकू कुमार, विक्की कुमार, विक्रांत कुमार, सबल कुमार सिंह सहित अनेक धर्मानुरागी मौजूद थे.

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Published by: Anand kumar

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