Munger Rain Update : दो दिनों की अच्छी बारिश ने मुंगेर जिले के किसानों को बड़ी राहत दी है. खेतों में पर्याप्त पानी जमा होने के बाद धान की रोपाई ने रफ्तार पकड़ ली है. कृषि विभाग के अनुसार जिले में अब तक लक्ष्य का 52.93 प्रतिशत धान का आच्छादन पूरा हो चुका है, जबकि मक्का और अरहर की खेती लगभग अपने लक्ष्य तक पहुंच गई है.
बारिश ने बदली खेतों की तस्वीर, तेज हुई धान की रोपाई
लगातार दो दिनों तक हुई वर्षा के बाद मुंगेर जिले के खेतों में पानी भर गया है. इससे किसानों ने तेजी से कादो तैयार कर धनरोपनी शुरू कर दी है. कुछ दिन पहले तक जहां धान रोपाई की रफ्तार काफी धीमी थी, वहीं अब अधिकांश गांवों में किसान पूरे उत्साह के साथ खेतों में उतर गए हैं. बारिश से धान के बिचड़े की रोपाई को अनुकूल वातावरण मिलने से खेती में नई उम्मीद जगी है.
धान के साथ मक्का और अरहर की खेती भी लक्ष्य के करीब
जिला कृषि कार्यालय के अनुसार इस वर्ष जिले में 36,843.57 हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती का लक्ष्य रखा गया है. इसके मुकाबले अब तक 19,501.65 हेक्टेयर क्षेत्र में धान का आच्छादन हो चुका है, जो कुल लक्ष्य का 52.93 प्रतिशत है. वहीं मक्का की खेती 8,659.70 हेक्टेयर के लक्ष्य के विरुद्ध 8,430.70 हेक्टेयर में पूरी हो चुकी है, जो 97.36 प्रतिशत है. अरहर की बुआई भी 759 हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले 737.50 हेक्टेयर में पूरी हो गई है, जो 97.17 प्रतिशत के बराबर है.
कृषि विभाग ने किसानों से की यह अपील
जिला कृषि पदाधिकारी सुष्मिता ने कहा कि हाल की बारिश किसानों के लिए काफी लाभकारी साबित हुई है. उन्होंने किसानों से मौसम का पूरा लाभ उठाते हुए जल्द से जल्द धनरोपनी का कार्य पूरा करने की अपील की है. उन्होंने भरोसा दिलाया कि कृषि विभाग किसानों को तकनीकी सलाह और आवश्यक सहयोग उपलब्ध करा रहा है, ताकि बेहतर उत्पादन सुनिश्चित किया जा सके.
असरगंज में अब भी डीजल पंप के सहारे खेती
हालांकि जिले के असरगंज प्रखंड के कई इलाकों में पर्याप्त बारिश नहीं होने से किसान अब भी डीजल पंप और बोरिंग के सहारे खेतों की सिंचाई कर रहे हैं. अमैया, चौरगांव, जोरारी, मकबा और सजुआ पंचायत के किसानों का कहना है कि डीजल से सिंचाई करने के कारण खेती की लागत काफी बढ़ गई है. मजदूरी भी महंगी हो चुकी है और डीजल पर किसी प्रकार का सरकारी अनुदान नहीं मिलने से किसानों की परेशानी बढ़ रही है. ऐसे में किसान अब अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं, ताकि लागत कम हो और रोपाई का काम समय पर पूरा हो सके.
