जमालपुर रेल इंजन कारखाना में प्रेमचंद जयंती पर हुई संगोष्ठी, मानवीय मूल्यों और हिंदी के प्रचार पर दिया जोर

Premchand Jayanti : जमालपुर रेल कारखाने में उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर एक साहित्यिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम में प्रेमचंद के साहित्य की प्रासंगिकता और मानवीय मूल्यों पर गहन चर्चा हुई. नई पीढ़ी के लिए उनकी रचनाओं को प्रेरणास्रोत बताया गया.

Premchand Jayanti : रेल इंजन कारखाना जमालपुर के केंद्रीय राजभाषा विभाग की ओर से शुक्रवार को उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर साहित्यिक संगोष्ठी एवं प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्य कारखाना प्रबंधक विनय प्रसाद वर्णवाल ने की. उन्होंने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य केवल पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि जीवन में आत्मसात करने योग्य है. उनकी रचनाओं में निहित मानवीय मूल्य आज भी समाज को सही दिशा प्रदान करते हैं.

सामाजिक चुनौतियों के बीच प्रेमचंद की प्रासंगिकता

मुख्य कारखाना प्रबंधक ने कहा कि वर्तमान समय में समाज अनेक सामाजिक, नैतिक और सांस्कृतिक चुनौतियों का सामना कर रहा है. ऐसे दौर में प्रेमचंद का साहित्य संवेदनशीलता, नैतिकता और सामाजिक उत्तरदायित्व का प्रभावी मार्गदर्शन करता है. उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों से हिंदी भाषा के अधिकाधिक प्रयोग तथा साहित्यिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी की अपील की.

साहित्य के विविध आयामों पर विशेषज्ञों ने रखे विचार

उप मुख्य राजभाषा अधिकारी ने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य भारतीय समाज के यथार्थ, संघर्ष, करुणा और मानवीय मूल्यों का सशक्त दस्तावेज है. उन्होंने साहित्य के माध्यम से वंचित, शोषित और उपेक्षित वर्गों को आवाज दी. संगोष्ठी में मुंगेर विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर हिंदी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. अभय कुमार ने प्रेमचंद के साहित्य में नैतिक मूल्य, शिक्षा और मानवीय आदर्शों पर प्रकाश डाला. डॉ. अभिलाषा कुमारी ने स्त्री विमर्श और नारी चेतना, जबकि डॉ. चंदन कुमार ने प्रेमचंद के सामाजिक सरोकारों पर अपने विचार व्यक्त किए. कुमार विजय गुप्त ने प्रेमचंद के साहित्य में भारतीय ग्रामीण जीवन के यथार्थ चित्रण पर चर्चा की.

नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत हैं प्रेमचंद

उप मुख्य यांत्रिक अभियंता प्रीतम कुमार ने कहा कि आज जब नई पीढ़ी मोबाइल, इंटरनेट और उपभोक्तावादी संस्कृति से प्रभावित हो रही है, तब प्रेमचंद की कहानियां बच्चों और युवाओं को संवेदनशीलता, त्याग, कर्तव्यबोध, मित्रता और मानवीय मूल्यों की ओर प्रेरित करती हैं. उन्होंने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य आज भी उतना ही प्रासंगिक है, जितना उनके समय में था.

प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में धनवंतरी टीम रही अव्वल

कार्यक्रम के दौरान प्रेमचंद के जीवन एवं साहित्य पर आधारित प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया. इसमें धनवंतरी टीम ने प्रथम, चाणक्य टीम ने द्वितीय तथा भवभूति टीम ने तृतीय स्थान प्राप्त किया. कार्यक्रम में केंद्रीय राजभाषा विभाग के प्रभारी डॉ. हिमालय कुमार हिमांशु सहित बड़ी संख्या में अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे.


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By विजय कुमार गुप्ता

विजय कुमार गुप्ता 20 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. ये सामाजिक, राजनीतिक और आपराधिक नब्ज को करीब से समझते हैं. इन्हें डिजिटल मीडिया में नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल के साथ प्रयोग करना बेहद पसंद है.

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