मानक के अनुसार नहीं चल रहा नेशनल अस्पताल, निबंधन रद्द करने की अनुशंसा
इलाज के नाम पर मोटी रकम वसूलने और रकम नहीं देने पर मरीज को नहीं छोड़ने के मामले में शहर के छोटी केलाबाड़ी में संचालित नेशनल अस्पताल की मुश्किल अब बढ़ने वाली है.
मुंगेर. इलाज के नाम पर मोटी रकम वसूलने और रकम नहीं देने पर मरीज को नहीं छोड़ने के मामले में शहर के छोटी केलाबाड़ी में संचालित नेशनल अस्पताल की मुश्किल अब बढ़ने वाली है, क्योंकि डीएम द्वारा गठित तीन सदस्यीय जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट में इस अस्पताल के मानक के अनुसार नहीं चलने के कारण निबंधन रद्द करने की अनुशंसा की गयी है. जिसे लेकर जिला रजिस्ट्रीकरण प्राधिकार, नैदानिक स्थापन, मुंगेर की बैठक में लिए गये निर्णय के अनुसार सिविल सर्जन द्वारा नेशनल अस्पताल को कारण बताओ नोटिस भेजा गया है.
बताया जाता है कि जिला पदाधिकारी सह जिला रजिस्ट्रीकरण प्राधिकार नैदानिक स्थापन मुंगेर के अध्यक्ष निखिल धनराज की अध्यक्षता में बैठक हुई. जिसमें नैदानिक स्थापन के बिना रजिस्ट्रीकरण संचालन, न्यूनतम मानकों का पालन नहीं करता हो इसके खिलाफ अनुमंडल वार गठित धावादलों के माध्यम से उसको चिह्नित कर सूची तैयार कर अगली बैठक में प्रस्तुत करने को कहा गया.नोटिस प्राप्ति के एक माह के अंदर प्रत्युत्तर-स्पष्टीकरण उपलब्ध कराने का निर्देश
नेशनल अस्पताल मुंगेर के संदर्भ में डीएम द्वारा एडीएम आपदा प्रबंधन की अध्यक्षता में गठित तीन सदस्यीय समिति जिसमें सिविल सर्जन, डॉ निरंजन कुमार सदस्य नामित थे, इनके द्वारा निरीक्षण कर जांच प्रतिवेदन बैठक में उपलब्ध कराया गया, जिसमें पाया गया कि नेशनल अस्पताल मुंगेर द्वारा एजीएआर एनेक्सर के अनुसार प्रदत्त औपबंधिक रजिस्ट्रीकरण की शर्तों का अनुपालन नहीं किया जा रहा है. जांच कमिटी द्वारा निरीक्षण में प्रशिक्षित मानव संसाधन की कमी, आवश्यक जीवन रक्षक उपकरणों की कमी, बेड संख्या में परिवर्तन, मानकीय बिंदु के अनुसार पैथोलॉजी, रेडियोलॉजी, ओपीडी, आइसीयू, ओटी कक्ष आदि के संचालन में कमी पायी गयी. जांच कमिटी ने अपने मंतव्य में नेशनल अस्पताल द्वारा मानकीय बिंदु पर संचालन में दृष्टिगत त्रुटि के आलोक में उनका निबंधन रद्द करने की अनुशंसा की है. जिस पर जिला रजिस्ट्रीकरण प्राधिकार द्वारा असैनिक शल्य चिकित्सक सह मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी सह संयोजक प्राधिकार के माध्यम से नेशनल अस्पताल को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए कहा गया कि क्यों नहीं उनके नैदानिक स्थापन का रजिस्ट्रीकरण रद्द कर दी जाय. नेशनल अस्पताल को नोटिस प्राप्ति के एक माह के अंदर नोटिस का प्रत्युत्तर-स्पष्टीकरण उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया. नोटिस में कहा गया कि नेशनल अस्पताल द्वारा विहित समयावधि में साक्ष्य सहित संतोषजक स्पष्टीकरण अप्राप्त रहने की स्थिति में जिला रजिस्ट्रीकरण प्राधिकार विधिसम्मत निर्णय लेगी.क्या है मामला
लखीसराय जिले के मेदनी चौकी निवासी महेश साहू के 35 वर्षीय पुत्र टिंकू साव 24 नवंबर 2025 को रोज की तरह साइकिल पर बर्तन बेचने निकले थे. हेमजापुर थाना क्षेत्र के शिवकुंड के पास एक वाहन की टक्कर से वह गंभीर रूप से घायल हो गए. स्थानीय लोगों ने उन्हें इलाज के लिए सदर अस्पताल, मुंगेर में भर्ती कराया, जहां प्राथमिक उपचार चल रहा था, लेकिन सदर अस्पताल के चिकित्सक सह दलाल ने उसे नेशनल अस्पताल भेज दिया, जहां टिंकु का दाहिना पैर इलाज के दौरान काट दिया गया. कई दिनों बाद जब पैसा देने में परिजन असमर्थ हो गये, तो मरीज को छोड़ देने के लिए अस्पताल प्रबंधन से कहा. कई दिनों तक जब मरीज को नहीं छोड़ा गया तो मरीज के माता-पिता जिलाधिकारी के पास मरीज को छुड़ाने की गुहार लेकर पहुंच गये थे. दोनों ने डीएम को बताया कि अस्पताल प्रबंधन ने मोटी रकम इलाज के नाम पर वसूले और रुपये मांग रहे हैं, तभी मेरे बेटे को अस्पताल से मुक्त करेंगे. जिस पर डीएम ने सिविल सर्जन को मरीज को वहां से निकाल कर अस्पताल में इलाज कराने का निर्देश दिया. बावजूद नेशनल अस्पताल प्रबंधन ने मरीज को जब नहीं छोड़ा तो डीएम ने तीन सदस्यीय जांच टीम गठित की थी, जिसके रिपोर्ट पर नेशनल अस्पताल को नोटिस भेजा गया है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
