मुंगेर विश्वविद्यालय में ‘भ्रष्टाचार का भूत भगाओ’ अभियान, सीनेट-सिंडिकेट सदस्यों का अनोखा विरोध प्रदर्शन

Munger University Protest: ओएमआर परीक्षा, छात्रों के शोषण और प्रशासनिक मनमानी के खिलाफ सीनेट व सिंडिकेट सदस्यों ने मंत्रोच्चारण के साथ दर्ज कराया विरोध

मुंगेर से अमित झा की रिपोर्ट

Munger University Protest: मुंगेर विश्वविद्यालय में गुरुवार को सीनेट सदस्य विक्की आनंद और सिंडिकेट सदस्य भारत सिंह जोशी के नेतृत्व में “भ्रष्टाचार का भूत भगाओ, लूटपाट का भूत भगाओ” अभियान चलाया गया. सिंडिकेट बैठक से पहले दोनों जनप्रतिनिधियों ने विश्वविद्यालय परिसर के विभिन्न कार्यालयों में जाकर मंत्रोच्चारण के साथ सांकेतिक विरोध प्रदर्शन किया. प्रदर्शन के दौरान विश्वविद्यालय प्रशासन पर छात्रों के शोषण, अवैध वसूली, मनमानी और पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया गया.

विभिन्न कार्यालयों में पहुंचकर जताया विरोध

आंदोलन के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने डीएसडब्ल्यू कार्यालय, सीसीडीसी कार्यालय, कुलसचिव कार्यालय, कुलपति कार्यालय तथा सिंडिकेट बैठक स्थल पर पहुंचकर विरोध दर्ज कराया. प्रदर्शनकारियों ने कहा कि विश्वविद्यालय में छात्रों के हितों की लगातार अनदेखी की जा रही है और प्रशासन मनमाने तरीके से फैसले ले रहा है.

ओएमआर आधारित परीक्षा का किया विरोध

सीनेट सदस्य विक्की आनंद ने कहा कि विश्वविद्यालय में दोबारा ओएमआर आधारित परीक्षा लागू करने का निर्णय पूरी तरह छात्र विरोधी है. उन्होंने कहा कि पूर्व में भी ओएमआर परीक्षा के कारण हजारों छात्रों का परिणाम लंबित रहा और व्यापक अव्यवस्था देखने को मिली थी. इसके बावजूद सीनेट और सिंडिकेट के निर्णयों की अनदेखी कर उसी व्यवस्था को फिर लागू करना प्रशासन की मनमानी को दर्शाता है.

प्रशासन पर डर का माहौल बनाने का आरोप

विक्की आनंद ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाने पर जवाब देने के बजाय शिक्षकों के तबादले, कर्मचारियों पर कार्रवाई और छात्रों को मुकदमों में फंसाने की धमकी दी जाती है. उनका कहना था कि इससे स्पष्ट है कि प्रशासन संवाद के बजाय दबाव की नीति अपना रहा है.

पारदर्शिता और जवाबदेही की उठाई मांग

Munger University Protest: सिंडिकेट सदस्य भारत सिंह जोशी ने कहा कि विश्वविद्यालय में पारदर्शिता और जवाबदेही लगातार कमजोर होती जा रही है. उन्होंने कहा कि छात्रों के हितों से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णयों की अनदेखी लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ है. विश्वविद्यालय प्रशासन को सीनेट और सिंडिकेट जैसे सर्वोच्च वैधानिक निकायों के निर्णयों का सम्मान करना चाहिए.

आंदोलन तेज करने की चेतावनी

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यदि छात्रों के हितों की अनदेखी और प्रशासनिक मनमानी पर रोक नहीं लगी तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा.

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By Pintu Pranav

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