मुंगेर और भागलपुर के बीच सड़क कनेक्टिविटी को लेकर बड़ी घोषणा हुई है. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि मुंगेर से सुलतानगंज होते हुए सबौर तक प्रस्तावित 83 किलोमीटर लंबी मरीन ड्राइव अब एलिवेटेड सड़क के बजाय एट-ग्रेड सड़क के रूप में बनाई जाएगी. बरसात खत्म होने के बाद इस परियोजना पर काम शुरू करने की बात कही गई है. बाढ़ प्रभावित इलाकों को ध्यान में रखते हुए सड़क के साथ सुरक्षा बॉल बनाने की भी योजना है.
बाढ़ प्रभावित मुंगेर के लिए क्यों अहम है सड़क परियोजना
मुंगेर और भागलपुर के गंगा किनारे बसे कई इलाके हर साल बाढ़ की चुनौती का सामना करते हैं. बाढ़ के दौरान सड़क संपर्क प्रभावित होने से लोगों को आवागमन, इलाज, जरूरी सामान और अन्य सेवाओं के लिए परेशानी उठानी पड़ती है. ऐसे में 83 किलोमीटर लंबी इस सड़क परियोजना को केवल दो शहरों को जोड़ने वाली सड़क के तौर पर नहीं, बल्कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में संपर्क व्यवस्था मजबूत करने वाली परियोजना के रूप में देखा जा रहा है.
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बुधवार को सदर प्रखंड के सीताकुंड प्लस टू उच्च विद्यालय में बने बाढ़ राहत शिविर के निरीक्षण के दौरान केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान को गंगा के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का मैप दिखाया. इसी दौरान उन्होंने प्रस्तावित सड़क परियोजना के स्वरूप में बदलाव की जानकारी दी.
एलिवेटेड रोड की जगह अब एट-ग्रेड सड़क
मुख्यमंत्री के अनुसार, पहले गंगा पथ वे को एलिवेटेड सड़क के रूप में विकसित करने की योजना थी. अब इसमें बदलाव करते हुए एट-ग्रेड सड़क बनाने का निर्णय लिया गया है. एट-ग्रेड सड़क सामान्य भू-स्तर पर तैयार की जाती है, जबकि एलिवेटेड सड़क जमीन से ऊंचाई पर बनाई जाती है.
परियोजना के स्वरूप में बदलाव के पीछे क्षेत्र की मौजूदा परिस्थितियों और जरूरतों को ध्यान में रखने की बात कही गई है. मुख्यमंत्री ने बताया कि बरसात समाप्त होने के बाद सड़क निर्माण की दिशा में काम शुरू किया जाएगा.
सड़क के साथ बनेगा सुरक्षा बॉल
बाढ़ की समस्या को देखते हुए केवल सड़क निर्माण पर ही जोर नहीं दिया जा रहा है. मुख्यमंत्री ने कहा कि गंगा के बाढ़ के कारण शहरी क्षेत्र को भी काफी नुकसान होता है. इसी को ध्यान में रखते हुए एट-ग्रेड सड़क के साथ सुरक्षा बॉल बनाया जाएगा.
सुरक्षा व्यवस्था का उद्देश्य बाढ़ के प्रभाव को कम करना और सड़क तथा आसपास के इलाकों को अतिरिक्त संरक्षण देना बताया गया है. इससे परियोजना का फोकस केवल यातायात सुविधा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्र की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर सड़क निर्माण की योजना तैयार की जाएगी.
मुंगेर से सबौर तक बनेगा नया संपर्क मार्ग
प्रस्तावित सड़क मुंगेर से शुरू होकर सुलतानगंज और भागलपुर होते हुए सबौर तक जाएगी. इसकी लंबाई करीब 83 किलोमीटर बताई गई है. यह मार्ग गंगा के किनारे के कई क्षेत्रों को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.
मुंगेर और भागलपुर के बीच आवागमन के लिए लोगों को मौजूदा मार्गों पर निर्भर रहना पड़ता है. नई सड़क तैयार होने के बाद इस क्षेत्र में सड़क संपर्क का एक अतिरिक्त विकल्प विकसित होगा. खासकर उन इलाकों के लिए यह महत्वपूर्ण हो सकता है, जहां बाढ़ के कारण सामान्य आवागमन प्रभावित होता है.
बाढ़ के समय कनेक्टिविटी पर रहेगा फोकस
मुख्यमंत्री ने सड़क परियोजना को बाढ़ की स्थिति में आवागमन को कम से कम प्रभावित करने के उद्देश्य से जोड़कर बताया है. गंगा के जलस्तर में वृद्धि के दौरान कई ग्रामीण और शहरी इलाकों में सड़क संपर्क प्रभावित होता है. ऐसे में बेहतर सड़क और सुरक्षा संरचना तैयार होने से लोगों की आवाजाही को बनाए रखने में मदद मिल सकती है. हालांकि, एट-ग्रेड सड़क सामान्य भू-स्तर पर बनाई जाती है, इसलिए बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में इसकी वास्तविक उपयोगिता निर्माण की ऊंचाई, जल निकासी व्यवस्था, सुरक्षा बॉल और अन्य इंजीनियरिंग उपायों पर भी निर्भर करेगी. परियोजना के विस्तृत तकनीकी स्वरूप और निर्माण मानकों की जानकारी सामने आने के बाद इसकी संरचना को लेकर तस्वीर और स्पष्ट होगी.
बारिश खत्म होते ही शुरू होगा काम
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि बरसात समाप्त होने के बाद परियोजना पर काम शुरू किया जाएगा. इससे संकेत है कि सरकार अब इस सड़क परियोजना को आगे बढ़ाने की तैयारी में है. मुंगेर से सुलतानगंज और भागलपुर होते हुए सबौर तक सड़क बनने से क्षेत्र में परिवहन व्यवस्था को नया विकल्प मिलने की उम्मीद है. बाढ़ राहत शिविर के निरीक्षण के दौरान हुई यह घोषणा ऐसे समय में सामने आई है, जब गंगा के जलस्तर और बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में सड़क संपर्क एक महत्वपूर्ण मुद्दा बना हुआ है. ऐसे में 83 किलोमीटर की प्रस्तावित मरीन ड्राइव का बदला हुआ स्वरूप मुंगेर और भागलपुर क्षेत्र के लिए आने वाले समय में महत्वपूर्ण सड़क परियोजना साबित हो सकता है.