मुंगेर से विजय कुमार गुप्ता की रिपोर्ट:
Munger Darshan Today: बिहार के ऐतिहासिक शहर मुंगेर स्थित चंडिका स्थान देश के प्रमुख शक्तिपीठों में शुमार है. यह धार्मिक स्थल न केवल बिहार बल्कि देश के विभिन्न राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है. सालभर यहां भक्त माता चंडिका के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं तथा परिवार की सुख-समृद्धि और मंगलकामना की प्रार्थना करते हैं.
मां सती की बाईं आंख गिरने की है मान्यता
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब भगवान शिव के अपमान से आहत होकर माता सती ने यज्ञ कुंड में आत्मदाह कर लिया था, तब भगवान शिव उनके पार्थिव शरीर को लेकर तांडव करने लगे. इसी दौरान भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र से माता सती के शरीर के विभिन्न अंग पृथ्वी के अलग-अलग स्थानों पर गिरे. मान्यता है कि माता सती की बाईं आंख मुंगेर स्थित चंडिका स्थान में गिरी थी. इसी कारण यह स्थल शक्तिपीठ के रूप में प्रसिद्ध है.
गुफा के भीतर स्थित है मां का पवित्र नेत्र
चंडिका स्थान की विशेषता यह है कि यहां मां चंडिका का पवित्र नेत्र पहाड़ी की एक गुफा के भीतर स्थापित है. इसी पवित्र स्थान के ऊपर मंदिर का निर्माण किया गया है. मंदिर परिसर में विभिन्न देवी-देवताओं के अलग-अलग मंदिर भी स्थापित हैं, जहां श्रद्धालु श्रद्धा और भक्ति के साथ पूजा-अर्चना करते हैं.
नवरात्र में उमड़ती है श्रद्धालुओं की भारी भीड़
चंडिका स्थान शक्तिपीठ में वर्षभर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन चैत्र और शारदीय नवरात्र के दौरान यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ती है. दर्शन के लिए लंबी कतारें लग जाती हैं और पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से सराबोर हो जाता है. मंदिर में बजने वाले घंटों और शंखों की ध्वनि से आसपास का क्षेत्र गुंजायमान रहता है.
आस्था और आध्यात्म का अद्भुत संगम
मुंगेर का चंडिका स्थान शक्तिपीठ धार्मिक आस्था, आध्यात्मिक ऊर्जा और सांस्कृतिक विरासत का अद्भुत संगम है. यही कारण है कि यह स्थल आज भी लाखों श्रद्धालुओं की अटूट श्रद्धा और विश्वास का केंद्र बना हुआ है.
