मुंगेर : सरकार शिशु मृत्यु दर कम करने और सरकारी अस्पतालों में बाल स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने पर लगातार जोर दे रही है, लेकिन मुंगेर सदर अस्पताल के एसएनसीयू और पीकू वार्ड के हालिया आंकड़े गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं. जुलाई माह में एसएनसीयू वार्ड में भर्ती 112 नवजातों में 9 की मौत हो गई, जबकि अगस्त के शुरुआती 20 दिनों में भर्ती 64 नवजातों में से 7 की जान जा चुकी है. वहीं, एक सप्ताह पूर्व पीकू वार्ड में एक ही दिन इलाज के दौरान दो बच्चों की भी मौत हुई थी.
जुलाई में करीब 8 प्रतिशत नवजातों की मौत
सदर अस्पताल में जन्म के बाद विभिन्न बीमारियों से पीड़ित नवजातों के इलाज के लिए आधुनिक सुविधाओं से लैस एसएनसीयू वार्ड संचालित है. यहां गंभीर नवजातों को भर्ती कर उपचार दिया जाता है.
वार्ड के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार जुलाई माह में कुल 112 नवजात भर्ती हुए थे, जिनमें 9 की इलाज के दौरान मौत हो गई. अगस्त के 20 दिनों में 64 नवजात भर्ती हुए, जिनमें से 7 की मौत हो चुकी है. इस अवधि में पांच नवजात लामा भी हुए हैं. यानी उनके परिजन अस्पताल की अनुमति के बिना या इलाज अधूरा छोड़कर उन्हें अन्यत्र ले गए.
पीकू वार्ड में एक ही दिन दो बच्चों की हुई थी मौत
सदर अस्पताल में एक से 10 वर्ष तक के बच्चों के इलाज के लिए वर्ष 2024 में करीब सात करोड़ रुपये की लागत से 32 बेड का पीकू वार्ड बनाया गया था. यहां शिशु ओपीडी, इमरजेंसी और भर्ती बच्चों के इलाज की सुविधा उपलब्ध है.
हालांकि, पिछले सप्ताह एक ही दिन पीकू वार्ड में इलाज के दौरान दो बच्चों की मौत हो गई थी. परिजनों की ओर से उस समय वार्ड में डॉक्टर की उपलब्धता और समय पर इलाज नहीं मिलने को लेकर सवाल उठाए गए थे. दोनों बच्चे तेज बुखार से पीड़ित बताए गए थे. मामले में एक अन्य गंभीर बच्चे को रेफर करने के लिए सिविल सर्जन को स्वयं पीकू वार्ड पहुंचना पड़ा था.
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे बदहाल व्यवस्था के वीडियो
सदर अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर कई वीडियो भी वायरल हुए हैं. इनमें कहीं पीकू वार्ड में स्वास्थ्यकर्मियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए तो कहीं डॉक्टरों की अनुपलब्धता का मामला सामने आया. कुछ मामलों में स्वास्थ्यकर्मियों पर कार्रवाई भी हुई, लेकिन इसके बावजूद स्वास्थ्य सेवाओं में अपेक्षित सुधार नहीं होने के आरोप लग रहे हैं.
चिकित्सकों की कमी से परेशानी : सिविल सर्जन
सिविल सर्जन डॉ. राजू ने बताया कि चिकित्सकों की कमी के कारण परेशानी हो रही है. हालांकि उपलब्ध डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मियों के माध्यम से सभी वार्डों में मरीजों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों के कार्यों की लगातार समीक्षा की जा रही है.
