32 करोड़ से बना मॉडल अस्पताल, फिर भी पुराने वार्डों में इलाज करा रहे मरीज
- उद्घाटन के बाद भी फरवरी माह में मुंगेरवासियों को नहीं हो पाया मॉडल अस्पताल की सुविधा
– उद्घाटन के बाद भी फरवरी माह में मुंगेरवासियों को नहीं हो पाया मॉडल अस्पताल की सुविधामुंगेर. मुंगेर स्वास्थ्य विभाग भले ही जिले में मरीजों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा देने का दावा कर रहा हो, लेकिन मुख्यालय स्थित सदर अस्पताल में मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं का अंदाजा केवल इसी बात से लगाया जा सकता है कि उद्घाटन के बाद भी सदर अस्पताल में 32 करोड़ की लागत से बना 100 बेड का मॉडल अस्पताल बंद पड़ा है. जबकि पुराने और जर्जर वार्डों में मरीज इलाज कराने को मजबूर हैं.
फरवरी में भी नहीं मिल पाया मॉडल अस्पताल की सुविधा
पांच फरवरी को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सदर अस्पताल में 32 करोड़ की लागत से बने मॉडल अस्पताल का उद्घाटन किया था. लेकिन उद्घाटन के बाद अब मामला जिला स्वास्थ्य विभाग और बीएमआइसीएल के बीच हैंडओवर को लेकर फंसा है. हाल यह है कि उद्घाटन के बाद से मॉडल अस्पताल में ताला लगा है. जहां उद्घाटन से पहले दावा किया जा रहा था कि जी 3 वाले मॉडल अस्पताल में पहले चरण में मरीजों को ओपीडी तथा इमरजेंसी की सुविधा मिलने लगेगी. वहीं माह के अंत तक शेष वार्डों को शिफ्ट कर दिया जायेगा, जिससे जिले के मरीजों को एक ही छत के नीचे सभी प्रकार की सुविधाएं मिलेगी, लेकिन उद्घाटन के बाद भी जिले के मरीजों को एक छत के नीचे अत्याधुनिक सुविधाएं मिलने का इंतजार है.पुराने और जर्जर वार्डों में इलाज करा रहे मरीज
सदर अस्पताल में जहां 100 बेड का मॉडल अस्पताल खड़ा है. वहीं यहां इलाज के लिए आने वाले मरीज अब भी पुराने और जर्जर वार्डों सहित बरामदे पर इलाज कराने को मजबूर हैं. जहां न तो मरीजों को ले जाने के लिये सही से रैंप की व्यवस्था है और न ही कोई विशेष स्वास्थ्य सुविधा. पुराने और फटे पुराने गद्दे और सीलन भरी दीवारों के बीच मरीज इलाज करा रहे हैं. इन वार्डों में पूरे दिन आवारा कुत्तों का जमावाड़ा लगा रहता है.कहते हैं सिविल सर्जन
सिविल सर्जन डॉ विनोद कुमार सिन्हा ने बताया कि मॉडल अस्पताल को अबतक हैंडओवर नहीं किया गया है. बीएमआइसीएल द्वारा एक सप्ताह में मॉडल अस्पताल हैंडओवर किये जाने की बात कही गयी थी. हैंडओवर के बाद सभी वार्डों को मॉडल अस्पताल में शिफ्ट किया जायेगा.जांच व इलाज के लिए भटक रहे मरीज
मुंगेर. मॉडल अस्पताल उद्घाटन के बाद लोगों को लगा था कि स्वास्थ्य विभाग के दावों के अनुसार ही अब एक छत के नीचे मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिलेगी, लेकिन यहां अब भी मरीज इलाज और जांच के लिए भटक रहे हैं. ओपीडी में इलाज के लिए आने वाले मरीजों को भर्ती होने के लिए जहां वापस 200 मीटर की दूरी तय कर सदर अस्पताल में आना पड़ता है. वहीं अस्पताल में भर्ती मरीजों को जांच कराने के लिए वही 500 मीटर की दूरी तय कर प्री-फैब्रिकेटेड अस्पताल जाना पड़ता है, जहां जाने के लिए मरीजों को घरों से ही लोगों को लाना पड़ता है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
