मुंगेर में PM Shree केंद्रीय विद्यालय खोलने को लेकर न मिल रही जमीन, 8 से 10 एकड़ की है जरूरत

Munger News: मुंगेर शहर में विद्यालय भवन निर्माण के लिए जमीन जब तक नहीं मिलती, तब तक यह विद्यालय अस्थायी भवन में संचालित किया जा सकता है. जिला प्रशासन से ऐसा अस्थायी भवन उपलब्ध कराने की मांग की जा रही है. जहां कम से कम 10 कमरा, प्रचार्य कक्ष, प्रशासनिक कक्ष एवं एक अन्य कक्ष की जरूरत पड़ती है. जहां तत्काल कक्षा एक से पांच तक की पढ़ाई का शुभारंभ कर दिया जाता.

Munger News: शिक्षा की गुणवत्ता को निखारने के लिए केंद्र सरकार ने बिहार के 16 जिलों में पीएम-श्री केंद्रीय विद्यालय खोलने की हरी झंडी दी है. जिसमें मुंगेर शहर में इस विद्यालय का खुलना प्रस्तावित है. लेकिन विद्यालय के लिए न तो जमीन मिल पा रही है और न ही अस्थायी भवन ही जिला प्रशासन उपलब्ध करा पा रही है. जिसके कारण मुंगेर के बच्चे केंद्रीय विद्यालय जैसी सुविधायुक्त शिक्षण संस्थान में पढ़ाई से वंचित हो रहे हैं. हालांकि केंद्रीय विद्यालय जमालपुर के प्राचार्य संतोष चौधरी ने जिलाधिकारी अरविंद कुमार वर्मा से मुलाकात कर जमीन अथवा अस्थाई भवन उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है.

मुंगेर शहर में प्रस्तावित है केंद्रीय विद्यालय

नए केंद्रीय विद्यालय के स्थापना के लिए बिहार राज्य के 16 जिलों में जगह प्रस्तावित किया गया है. जिसमें नालंदा में दो, पटना में दो, मुंगेर, पूर्णियां, मुजफ्फपुर, भोजपुर, गयाजी, भागलपुर, कैमुर, मधेपुरा, मधुबनी, शेखपुरा, दरभंगा और अरवल में एक-एक शामिल है. मुंगेर में जो जगह प्रस्तावित है वह मुंगेर शहर है. लेकिन इस विद्यालय को दूर ले जाने की साजिश रची जा रही है.

सूत्रों की माने तो विद्यालय के लिए 8 से 10 एकड़ जमीन की जरूरत पड़ती है. जिसमें विद्यालय भवन के साथ ही प्रशासनिक भवन, होस्टल, खेल मैदान, स्टॉफ क्वार्टर का निर्माण किया जाना है.

इसके लिए जिला प्रशासन ने संग्रामपुर में 5 एकड़ जमीन को चिह्नित किया है. लेकिन पीएम-श्री केंद्रीय विद्यालय स्थापना को लेकर जिले में बनी टीम को यह जमीन रास नहीं आ रही है. टीम शहर में जगह उपलब्ध हो इसके लिए प्रयासरत है. विदित हो कि जमीन राज्य सरकार को ही उपलब्ध कराना है.

अस्थायी भवन मिलती तो मुंगेर शहर में शुरू हो जाता केंद्रीय विद्यालय

जानकारों की माने तो प्रति वर्ष एक क्लास में तब बढोत्तरी होती जब जमीन पर विद्यालय भवन बनना शुरू हो जाता है. कुल मिलाकर कहा जाय तो अस्थायी भवन मेंं तत्काल विद्यालय शुरू होता और भवन बनने के बाद अस्थायी भवन में संचालित विद्यालय नये भवन में शिफ्ट कर दिया जाता है. इसके लिए जरूरी है कि जमीन और अस्थायी भवन शहर में ही मिले.

क्या बोले केंद्रीय विद्यालय जमालपुर के प्राचार्य

केंद्रीय विद्यालय जमालपुर के प्राचार्य संतोष चौधरी ने बताया कि मुंगेर शहर में पीएम-श्री केंद्रीय विद्यालय खोलने की स्वीकृति प्रदान की गयी है. विद्यालय भवन निर्माण के लिए जमीन और तत्काल 1-2 से 5 तक की पढ़ाई प्रारंभ करने के लिए अस्थायी भवन उपलब्ध कराने के लिए जिलाधिकारी से मुलाकात की गयी है. जिलाधिकारी ने आश्वस्त किया कि शीघ्र ही जमीन व अस्थायी भवन उपलब्ध करायी जायेंगी.

जमीन चयन से पहले इन बातों पर देना होगा ध्यान

केंद्रीय विद्यालय स्थापना को लेकर बनी टीम की माने तो जिस जमीन पर विद्यालय भवन बनेगा, वह किसी कीमत पर न तो अतिक्रमित हो और न ही विवादित हो. हाई टेंशन तार उस जमीन के पास-पास से गुजरी नहीं होनी चाहिए. साथ ही नदी-नाला के पास वह जमीन नहीं हो. स्कूल आने-जाने के लिए सुगम और पक्का रास्ता होना चाहिए.

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केंद्रीय विद्यालय से जिले के बच्चों को मिलेगी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा

देश में करीब 13 सौ केंद्रीय विद्यालय है. इन विद्यालयों को वैसे तो सेना व केंद्रीय कर्मचारियों के बच्चों की शिक्षा के लिए शुरू किया गया था, लेकिन बाद में इन विद्यालयों की बढ़ती प्रतिष्ठा के बाद इन्हें स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता के लिए राज्यों की मांग के बाद इन्हें अन्य क्षेत्रों में आमलोगों के लिए भी खोल दिया गया.

मौजूदा समय में सेना और केंद्रीय कर्मचारियों के बच्चों को दाखिला देने के बाद खाली सीटों पर आम बच्चों को प्रवेश दिया जाता है. केंद्रीय विद्यालय जमालपुर में कक्षा एक से प्लस टू तक की पढ़ाई होती है. जिसमें 16 सौ से अधिक बच्चे पढ़ाई करते हैं. अगर मुंगेर में भी विद्यालय खुल जाय तो बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल पाती.

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Author: Paritosh Shahi

परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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