श्रावणी मेले में सुल्तानगंज से देवघर जा रहे श्रद्धालुओं की सहूलियत को लेकर जिला प्रशासन द्वारा किए जा रहे बड़े-बड़े दावों की पोल खुलती नजर आ रही है. मुंगेर जिले के असरगंज प्रखंड अंतर्गत कमराय कच्ची कांवरिया पथ पर 200 बेड का सर्वसुविधायुक्त टेंट सिटी तो बना दिया गया, लेकिन श्रद्धालुओं को रियायती दर पर स्वच्छ और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के लिए बनाया गया 'जीविका दीदी का भोजन केंद्र' मेला शुरू होने के 5 दिन बाद भी ताले में बंद है.
5 दिन बीतने के बाद भी नहीं शुरू हुई भोजन की सुविधा
श्रावणी मेले में कांवरियों को बाजार के महंगे और मिलावटी खाने से बचाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने जीविका (Jeevika) के माध्यम से विशेष भोजन केंद्र स्थापित करने की योजना बनाई थी:
- प्रशासनिक उदासीनता: सावन की शुरुआत हुए पांच दिन का समय बीत चुका है, लेकिन जीविका दीदी का भोजन केंद्र अब तक संचालित नहीं किया जा सका है.
- कांवरियों की मजबूरी: सरकारी भोजन केंद्र शुरू न होने के कारण दूर-दराज से आ रहे श्रद्धालुओं को मजबूरी में निजी होटलों और सड़क किनारे की दुकानों पर महंगे दामों में भोजन करना पड़ रहा है.
श्रद्धालुओं ने प्रशासनिक दावों पर उठाए सवाल
कमराय कच्ची कांवरिया पथ से गुजर रहे कांवरियों ने बताया कि अगर समय रहते यह भोजन केंद्र चालू हो जाता, तो रोजाना हजारों कांवरियों को सस्ता, शुद्ध और सात्विक भोजन मिल पाता:
कांवरियों का कहना: "प्रशासन केवल टेंट सिटी और सुविधाओं के बड़े-बड़े पोस्टर लगाता है. मेले के पांचवें दिन भी भोजन केंद्र बंद रहना अधिकारियों की लापरवाही को दर्शाता है. निजी दुकानदार कांवरियों से मनमाना पैसा वसूल रहे हैं."
भोजन केंद्र जल्द शुरू कराने की मांग
प्रशासनिक अनदेखी के कारण जहां एक ओर कांवरिया श्रद्धालु परेशानी झेल रहे हैं, वहीं दूसरी ओर स्थानीय ग्रामीणों और समाजसेवियों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि कमराय स्थित जीविका दीदी के भोजन केंद्र को बिना किसी देरी के तुरंत शुरू कराया जाए, ताकि कांवरियों को उचित सुविधा मिल सके.
