Munger News: बिहार के सुदूर ग्रामीण इलाकों में रहने वाली महिलाओं की किस्मत अब सिर्फ घर की चारदीवारी तक सीमित नहीं रहने वाली है. मुंगेर जिले के हवेली खड़गपुर अनुमंडल क्षेत्र स्थित गौरवडीह गांव में मंगलवार का सूरज एक नई उम्मीद और स्वावलंबन की नई किरण लेकर उगा. गांव के बीचों-बीच जब जिला उद्योग केंद्र मुंगेर और जीविका के साझा प्रयास से विशेष उद्यम रजिस्ट्रेशन कैंप सजा, तो देखते ही देखते दर्जनों जीविका दीदियों का तांता लग गया. जो महिलाएं कल तक छोटे-छोटे कामों के लिए दूसरों पर निर्भर थीं, वे अब आधिकारिक तौर पर उद्यमी बनने की राह पर अग्रसर हो चुकी हैं.
सरकारी योजनाओं और बैंक लोन की राह होगी अब आसान
अक्सर देखा जाता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने की इच्छा और हुनर होने के बावजूद महिलाएं पूंजी और सही मार्गदर्शन के अभाव में पिछड़ जाती हैं. इसी जमीनी समस्या को दूर करने के लिए इस विशेष शिविर का आयोजन किया गया था. शिविर के दौरान जीविका दीदियों को उद्यम रजिस्ट्रेशन का सही मतलब और उससे मिलने वाले दूरगामी फायदों के बारे में बारीकी से समझाया गया. अब इस आधिकारिक रजिस्ट्रेशन के बाद दीदियों को न केवल केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न रोजगारपरक योजनाओं का सीधा लाभ मिलेगा, बल्कि अपने व्यापार को बड़ा बनाने के लिए बैंकों से कम ब्याज पर आसानी से ऋण (लोन) भी उपलब्ध हो सकेगा.
उद्यम रजिस्ट्रेशन से बदलेगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की सूरत
मौके पर मौजूद जीविका की एलएचएस कोमल कुमारी ने इस पहल के मानवीय और आर्थिक पहलुओं पर रोशनी डालते हुए बताया कि जीविका दीदियों को स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ना ही इसका मुख्य ध्येय है. उन्होंने कहा कि जब एक महिला आर्थिक रूप से सशक्त होती है, तो पूरा परिवार और आने वाली पीढ़ी समृद्ध होती है. उद्यम रजिस्ट्रेशन होने से दीदियों द्वारा बनाए जा रहे घरेलू और हस्तशिल्प उत्पादों को बाजार में एक नई पहचान मिलेगी. इससे बिचौलियों का एकाधिकार खत्म होगा और दीदियों को उनकी मेहनत का सीधा और वाजिब मुनाफा मिलेगा.
स्थानीय प्रभाव और महिलाओं के चेहरों पर झलकी नई चमक
शिविर में विभिन्न स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी दर्जनों महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और अपना ऑनलाइन उद्यम पंजीकरण कराया. कागजी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद महिलाओं के चेहरों पर आत्मनिर्भर बनने का अलग ही आत्मविश्वास नजर आ रहा था. स्थानीय ग्रामीणों का मानना है कि गौरवडीह गांव से शुरू हुई यह पहल आसपास के अन्य गांवों की महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगी. छोटे-छोटे कुटीर उद्योगों, सिलाई, अचार-पापड़ निर्माण और डेयरी जैसे व्यवसायों को अब सरकारी मान्यता मिलने से गांव की आर्थिक रंगत में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा.
Munger News: प्रशासनिक मुस्तैदी और आगे की रणनीति
जिला उद्योग केंद्र, मुंगेर और जीविका प्रशासन ने आश्वस्त किया है कि यह केवल एक दिन का शिविर नहीं है, बल्कि आने वाले दिनों में अनुमंडल के अन्य पंचायतों और सुदूर गांवों में भी इसी तरह के विशेष शिविर आयोजित किए जाएंगे. उद्यम रजिस्ट्रेशन कराने वाली दीदियों को आगे व्यापार का प्रशिक्षण देने और बाजार से जोड़ने के लिए भी विशेष कार्ययोजना बनाई जा रही है. स्थानीय प्रशासन का यह कदम महिलाओं को सशक्त बनाने और ग्रामीण बेरोजगारी पर प्रहार करने की दिशा में एक बेहद ठोस और दूरगामी प्रयास माना जा रहा है.
