जमालपुर जंक्शन बनेगा मालदा मंडल का पहला 'जीरो वेस्ट' स्टेशन, कचरे से तैयार होगी जैविक खाद

जमालपुर रेलवे स्टेशन स्वच्छता में एक नया मुकाम हासिल करने की तैयारी में है, जो मालदा डिवीजन का पहला 'जीरो वेस्ट' स्टेशन बनने की ओर अग्रसर है। स्टेशन परिसर से निकलने वाले जैविक कचरे को खाद में बदलकर उसका वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जाएगा।

जमालपुर. पूर्व रेलवे के मालदा डिवीजन का जमालपुर रेलवे स्टेशन अब स्वच्छता के क्षेत्र में नयी पहचान बनाने की तैयारी में है. जमालपुर स्टेशन को मालदा डिवीजन का पहला जीरो वेस्ट रेलवे स्टेशन बनाने की तैयारी शुरू कर दी गयी है. स्टेशन परिसर से हर दिन निकलने वाले जैविक कचरे को अब बेकार समझकर फेंका नहीं जाएगा, बल्कि उससे जैविक खाद तैयार की जाएगी. इस योजना को जमीन पर उतारने के लिए स्टेशन परिसर में जल्द ही स्वचालित खाद संयंत्र मशीन स्थापित की जाएगी. मशीन के चालू होने के बाद स्टेशन और उससे जुड़े विभिन्न स्थानों से निकलने वाले जैविक कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जा सकेगा.

फूड प्लाजा से वंदे भारत तक का कचरा होगा प्रोसेस

प्रस्तावित संयंत्र में जमालपुर स्टेशन परिसर के अलावा फूड प्लाजा, क्रू-लॉबी और पैंट्री कार से निकलने वाले जैविक कचरे को प्रोसेस किया जाएगा. सब्जी और फलों के छिलके, बची हुई खाद्य सामग्री समेत अन्य जैविक पदार्थों से खाद तैयार करने की योजना है. प्रीमियम ट्रेनों और वंदे भारत जैसी ट्रेनों से निकलने वाले जैविक कचरे को भी इस व्यवस्था से जोड़ने की तैयारी है. इससे स्टेशन और ट्रेनों से निकलने वाले खाद्य कचरे को खुले में फेंकने की जरूरत कम होगी.

बिना बदबू और गंदे पानी के तैयार होगी खाद

रेलवे के अनुसार, प्रस्तावित स्वचालित खाद संयंत्र कम तापमान पर जैविक कचरे को प्रोसेस कर खाद तैयार करेगा. बताया गया है कि मशीन 40 डिग्री से कम तापमान पर काम करते हुए बिना बदबू और गंदे पानी के खाद बनाने में सक्षम होगी.

मशीन को कम बिजली खपत के साथ संचालित करने की योजना है. खास बात यह है कि इसमें IoT और AI तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा. इससे मशीन के संचालन और कचरा प्रोसेसिंग की निगरानी को स्मार्ट तरीके से करने में मदद मिलेगी.

वेबसाइट पर दिखेगी स्वच्छता की लाइव प्रगति

रेलवे इस योजना को सिर्फ स्टेशन परिसर तक सीमित नहीं रखना चाहता. सूत्रों के अनुसार, स्टेशनों की स्वच्छता रैंकिंग और संबंधित प्लांट की प्रगति को वेबसाइट पर प्रदर्शित करने की योजना है.

इससे रेल यात्रियों को यह जानकारी मिल सकेगी कि किसी स्टेशन पर कितना कचरा एकत्र किया गया और उसमें से कितना जैविक कचरा खाद में बदला गया. पायलट प्रोजेक्ट के रूप में जमालपुर स्टेशन से इस पहल की शुरुआत किए जाने की तैयारी है.

आउटर में कचरे के ढेर से अब छुटकारा मिलने की उम्मीद

जमालपुर स्टेशन के पीछे और आउटर क्षेत्र में कचरा फेंके जाने की समस्या रही है. इससे स्टेशन परिसर के आसपास गंदगी फैलने के साथ ट्रैक किनारे कचरे में आग लगने की घटनाएं भी सामने आती रही हैं.

मंडल मुख्यालय ने अब इस समस्या पर निगरानी बढ़ा दी है. रेलवे की ओर से ड्रोन सर्वे शुरू किया गया है. सर्वे के दौरान रेलवे की जमीन पर बाहरी लोगों द्वारा कचरा फेंके जाने की स्थिति सामने आने के बाद चारदीवारी की ऊंचाई बढ़ाने का काम किया गया है.

इसके साथ ही सीसीटीवी के जरिये निगरानी को भी स्मार्ट बनाया जा रहा है. रेलवे का लक्ष्य स्टेशन की जमीन पर अवैध रूप से कचरा डंप करने की गतिविधियों को रोकना है.

पहले रेलवे कॉलोनी, फिर किसानों तक पहुंचेगी खाद

स्वचालित खाद संयंत्र से तैयार खाद का इस्तेमाल शुरुआती दौर में रेलवे कॉलोनी और स्टेशन परिसर के गार्डन में किया जाएगा. इससे रेलवे को अपने परिसर में ही तैयार जैविक खाद का उपयोग करने का अवसर मिलेगा.

इसके बाद स्थानीय किसानों को भी उचित कीमत पर खाद उपलब्ध कराने की योजना बनायी गयी है. मंडल मुख्यालय स्थानीय नगर निकाय के सहयोग से कचरा कलेक्शन और तैयार खाद की बिक्री को लेकर मॉडल तैयार कर रहा है.

डीआरएम ने बताया, स्वच्छता में मॉडल बनेगा जमालपुर

मालदा के डीआरएम मनीष कुमार गुप्ता ने बताया कि जमालपुर जंक्शन रेलवे स्टेशन को स्वच्छता के क्षेत्र में मॉडल स्टेशन बनाया जाएगा. उन्होंने कहा कि स्वचालित खाद मशीन की स्थापना से कचरे के निस्तारण की व्यवस्था बेहतर होगी.

रेलवे की इस पहल का उद्देश्य जैविक कचरे का उपयोग कर खाद तैयार करने के साथ स्टेशन के आसपास होने वाली अवैध डंपिंग पर रोक लगाना है. यदि योजना निर्धारित तरीके से लागू होती है, तो जमालपुर स्टेशन मालदा डिवीजन में कचरा प्रबंधन की नयी व्यवस्था का मॉडल बन सकता है.

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By विजय कुमार गुप्ता

विजय कुमार गुप्ता 20 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. ये सामाजिक, राजनीतिक और आपराधिक नब्ज को करीब से समझते हैं. इन्हें डिजिटल मीडिया में नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल के साथ प्रयोग करना बेहद पसंद है.

Read More
Tags
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >