Munger Temple Story : मुंगेर जिले के टेटियाबंबर प्रखंड स्थित जगतपुरा दुर्गा मंदिर पिछले 252 वर्षों से लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है. मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मां विंध्याचल दुर्गा की पूजा करने वाले भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है. यही वजह है कि हर मंगलवार और नवरात्र के दौरान मंदिर में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ता है.
252 वर्षों से अटूट आस्था का केंद्र बना है जगतपुरा दुर्गा मंदिर
टेटियाबंबर प्रखंड का ऐतिहासिक जगतपुरा दुर्गा मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान भी है. करीब ढाई सौ वर्षों से यहां मां विंध्याचल दुर्गा की आराधना होती आ रही है. स्थानीय लोगों के अनुसार मंदिर में आने वाला कोई भी श्रद्धालु खाली हाथ नहीं लौटता. श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूरी होने पर दोबारा मंदिर पहुंचकर माता का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं.
संतान प्राप्ति की मन्नत से जुड़ी है मंदिर की स्थापना की कहानी
मंदिर के इतिहास के अनुसार जगतपुरा के तत्कालीन जमींदार काली सिंह संतान सुख से वंचित थे. उन्होंने मां दुर्गा से संतान प्राप्ति की मन्नत मांगी. लगभग दस वर्षों के लंबे इंतजार के बाद उनके घर पुत्री का जन्म हुआ. इसे मां दुर्गा का चमत्कार मानते हुए उन्होंने मंदिर के नाम अपनी जमीन दान कर दी. इसके बाद गांव में नियमित रूप से दुर्गा पूजा की परंपरा शुरू हुई, जो आज भी पूरे श्रद्धाभाव से निभाई जा रही है.
स्वप्न में मां ने दिए दर्शन, फिर हुई मंदिर की स्थापना
मंदिर के पुजारी पंडित श्याम के अनुसार मंदिर से जुड़ी एक और प्राचीन मान्यता भी प्रचलित है. उनके पूर्वज एक बार नदी किनारे पहुंचे, जहां उन्हें एक कुमारी कन्या मिली. कन्या ने वस्त्र मांगा तो उन्होंने अपना गमछा दे दिया. कन्या ने साथ चलने का आग्रह किया, लेकिन वे घर जाकर लौटने की बात कहकर चले गए. जब वापस लौटे तो कन्या वहां नहीं थी. उसी रात मां विंध्याचल दुर्गा ने उन्हें स्वप्न में दर्शन देकर मंदिर स्थापना का निर्देश दिया. इसके बाद इस पवित्र मंदिर की स्थापना हुई.
सोने-चांदी के मुकुट और भव्य नवरात्र महोत्सव है खास आकर्षण
मंदिर में मां दुर्गा, मां लक्ष्मी और मां सरस्वती की प्रतिमाएं स्थापित हैं, जिनके मुकुट सोने और चांदी से निर्मित हैं. यह मंदिर की ऐतिहासिक और धार्मिक गरिमा को और भी विशेष बनाते हैं. शारदीय नवरात्र के दौरान यहां विशेष पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन, हवन और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जाता है. मंदिर समिति और ग्रामीणों के सहयोग से वर्षों पुरानी यह परंपरा आज भी पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ निभाई जा रही है.
हर मंगलवार उमड़ती है श्रद्धालुओं की भीड़
मंगलवार के दिन मंदिर परिसर में सुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहता है. मुंगेर ही नहीं, बल्कि आसपास के कई जिलों और गांवों से भी श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं. स्थानीय लोगों का मानना है कि मां विंध्याचल दुर्गा की कृपा से यह मंदिर आज भी क्षेत्रवासियों की आस्था, विश्वास और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक बना हुआ है.
