पेमेंट गेटवे एजेंसी की जांच कर ब्लैक लिस्ट करे विश्वविद्यालय : अभाविप

विश्वविद्यालय में वर्तमान में अनियमितताएं चरम पर हैं.

मुंगेर

मुंगेर विश्वविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है. जिसके कारण हजारों छात्र-छात्राओं का भविष्य संकट में पड़ गया है. परीक्षाओं के आयोजन में लगातार देरी, परिणाम प्रकाशन में अनावश्यक विलंब, नामांकन प्रक्रिया में अनियमितता, छात्र हित से जुड़े कार्यों में पारदर्शिता की कमी तथा विभिन्न स्तरों पर भ्रष्टाचार जैसी समस्याएं आम हो चुकी हैं. उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से पेमेंट गेटवे द्वारा विद्यार्थियों से लिये जा रहे अतिरिक्त राशि की जांच कर एजेंसी को ब्लैक लिस्ट करने की मांग की. उक्त बातें गुरुवार को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के प्रदेश कार्य समिति सदस्य सन्नी कुमार ने प्रेस वार्ता के दौरान कही. मौके पर प्रदेश सह मंत्री आयुषी गुप्ता, विभाग संगठन मंत्री पशुपतिनाथ उपमन्यु, नगर मंत्री सचिन कुमार, नगर सह मंत्री अंकित कुमार मौजूद थे.

छात्र नेताओं ने कहा कि विश्वविद्यालय में वर्तमान में अनियमितताएं चरम पर हैं. विश्वविद्यालय पोर्टल पर किसी भी प्रकार का शुल्क पर प्रति ट्रांजैक्शन 35.40 रुपए का अधिक भुगतान गेटवे के नाम पर लिया जाता है. विद्यार्थी पूरे वर्ष में कम से कम पांच बार पेमेंट विश्वविद्यालय पोर्टल पर करते हैं. उन्होंने कहा कि अवैध वसूली, दाखिला शुल्क ,पंजीयन शुल्क ,परीक्षा शुल्क व अन्य संबंधित शुल्कों के भुगतान में पेमेंट गेटवे एजेंसी द्वारा छात्रों के मनमाने एवं नियम विरुद्ध तरीके से कुल 35 रुपया 40 पैसा चार्ज की वसूली पर तत्काल रोक लगाई जाए और इसकी पूर्णता जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए. एयरपे कंपनी के ट्रांजैक्शन फैलियर की दर भी बहुत ज्यादा है और विश्वविद्यालय में कई ऐसे विद्यार्थी हैं. जिनका ट्रांजैक्शन सक्सेसफुल नहीं होने के बाद भी उसके खाते से रकम कट जाती है और मजबूरन उन्हें दूसरी बार पुनः पेमेंट करना पड़ता है. खाते से कटी रकम आपस लेने के लिए विद्यार्थी यूनिवर्सिटी की दौड़ लगाते रहते हैं. जबकि पेमेंट गेटवे एजेंसी के खाते में अनाधिकृत रूप से यह राशि पड़ी रहती है. जो एक तरह के वित्तीय अनियमितता है. इसकी जांच कर कठोर कार्रवाई की जाए और कंपनी को ब्लैक लिस्ट किया जाए.

इंटर्नशिप के नाम पर भी किया जा रहा अवैध वसूली

छात्र नेताओं ने कहा कि एक ओर जहां विश्वविद्यालय में ओएमआर शीट वाले उत्तर पुस्तिका पर बार कोडिंग के नाम पर बिना टेंडर नियम प्रक्रिया के एजेंसी को लगभग करोड़ का पेमेंट कर दिया. वही स्नातक सेमेस्टर-5 में इंटर्नशिप प्रशिक्षण के नाम पर विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय के प्रशासनिक अधिकारियों के द्वारा फेक एनजीओ और अन्य संस्थाओं द्वारा हजारों रुपये शुल्क लेकर इंटर्नशिप कराने का अवैध धंधा कराया जा रहा है. जिसपर तत्काल प्रभाव से रोक लगाया जाये.

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By AMIT JHA

AMIT JHA is a contributor at Prabhat Khabar.

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