उपेक्षा का दंश झेल रहा हवेली खड़गपुर का सरकारी बस स्टैंड
हवेली खड़गपुर.
बिहार राज्य पथ परिवहन निगम के अधीन संचालित सरकारी बस स्टैंड अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है. उचित रखरखाव व अतिक्रमण की भेंट चढ़ चुकी बस स्टैंड अब अपने जीर्णोद्धार का वाट जोह रही है. स्टैंड की स्थिति ऐसी है कि भवन धूल फांक रहा है. स्टैंड के हालात पर गौर करें तो इस बस पड़ाव का कार्यालय हो या टिकट काउंटर सभी कमरे जर्जर अवस्था में हैं. यात्रियों को बैठने तक की जगह तक नहीं है. बरसात के मौसम में छत से पानी टपकता है, जिससे काम करने में कर्मियों को परेशानी होती है.
खड़गपुर को नगर पंचायत से नगर परिषद का दर्जा मिलने के लगभग तीन साल बीतने के बाद भी खड़गपुर में नागरिक सुविधाएं नदारद है. यात्रियों की समस्या बरकार है. अंबेडकर चौक के समीप का बस स्टैंड परिसर प्रशासनिक व राजनीतिक उदासीनता का शिकार बना हुआ है, जबकि बस स्टैंड हर साल लाखों का राजस्व देता है. बावजूद बस स्टैंड में यात्रियों को मिलने वाली सुविधाएं नदारद है. आलम यह है कि बारिश के महीनों में हल्की सी भी बारिश होने पर पूरा बस स्टैंड कीचड़ व सड़ांध से भर जाता है.
रोजाना करीब आठ हजार यात्री पकड़ते हैं बस
आंबेडकर चौक स्थित बस स्टैंड में रोजाना करीब 8 हजार से अधिक लोगों की आवाजाही होती है. बावजूद स्टैंड के चारों ओर बदबूदार गंदगी फैली रहती है. बस स्टैंड से राजधानी पटना, पूर्णिया, बेगूसराय, खगड़िया, हजारीबाग, देवघर सहित मुंगेर के लिए एक दर्जन से अधिक बसों का आना-जाना होता है. इसके अलावा जमुई, अमरपुर के लिए भी इस बस स्टैंड से रोजाना दर्जनों बसें खुलती हैं. फिर भी यहां मूलभूत सुविधा का अभाव है. यहां काम करने वाले कर्मियों को गर्मियों के मौसम में खड़े होने के लिए जगह नहीं है. यूं कहें विभाग मालामाल हो रहा है और यात्री बस स्टैंड का लाभ नहीं ले पा रहे हैं. इतना ही नहीं बस स्टैंड के समीप रोजाना करीब सौ ऑटो व ई रिक्शा मुंगेर, बरियारपुर, तारापुर के लिए खुलती है. सभी ऑटो व ई रिक्शा चालक भी बस स्टैंड परिसर में यत्र-तत्र खड़ी कर देते हैं. जिससे यात्रियों को परेशानी होती है.
बसों में बसों में फायर सेफ्टी, फर्स्ट एड बॉक्स तक उपलब्ध नहीं
स्टैंड में दूरदराज के लिए खुलने वाले बसों में बसों में फायर सेफ्टी, फर्स्ट एड बॉक्स तक उपलब्ध नहीं है. बस स्टैंड में शौचालय नहीं होने से यात्रियों और कर्मचारियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. यात्रियों का कहना है कि इस बस स्टैंड में कोई भी यात्री सुविधा नहीं है. अगर आमदनी की बात करें तो 25 से 30 हजार रुपये तक रोजाना आमदनी होती है. बावजूद सरकारी बस स्टैंड की हालत दयनीय है. इस ओर न तो अधिकारी ध्यान दे रहे हैं और न ही स्थानीय जनप्रतिनिधि. यात्रियों को अपने सूरते हाल पर छोड़ दिया गया है.
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