मुंगेर में गंगा के घटने की रफ्तार धीमी: रातभर में 3 सेमी कम हुआ जलस्तर, चंडिका स्थान में पूजा ठप, राहत शिविरों में पहुंचे लोग

मुंगेर जिले में गंगा के जलस्तर में गिरावट की रफ्तार बेहद धीमी है, जिससे बाढ़ पीड़ितों को फौरी राहत नहीं मिल पा रही है. हजारों लोग अभी भी पानी से घिरे हैं और जनजीवन अस्त-व्यस्त है. राहत शिविरों में भोजन की व्यवस्था की गई है, लेकिन हालात सामान्य होने में वक्त लगेगा.

मुंगेर जिले में गंगा नदी के जलस्तर में गिरावट का सिलसिला शुरू हो गया है. हालांकि, यह बहुत धीमी गति से हो रहा है. इस कारण बाढ़ पीड़ितों को तत्काल राहत मिलने की उम्मीद कम है. मंगलवार की रात 10 बजे गंगा का जलस्तर 39.96 मीटर रिकॉर्ड किया गया था, जो पूरी रात में मात्र तीन सेंटीमीटर घटकर बुधवार सुबह छह बजे 39.93 मीटर दर्ज किया गया.

पानी घटने की कछुआ चाल के कारण जिले में बाढ़ की विभीषिका और तबाही जस की तस बनी हुई है. ग्रामीण अंचलों से लेकर नगर निगम क्षेत्र के निचले मोहल्लों तक हजारों की आबादी अब भी पानी के घेरे में फंसी है और जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो चुका है. उनका घर, उनकी आजीविका, सब कुछ पानी में बह गया है, और भविष्य अनिश्चित लग रहा है. लाल दरवाजा इलाके में रहने वाली 65 वर्षीय कमला देवी बताती हैं कि उनका पूरा घर पानी में डूब गया है और वे केवल छत पर शरण लिए हुए हैं.

राहत शिविरों में उमड़ी भीड़, दोनों वक्त मिल रहा भोजन

बाढ़ के पानी से घिरे बेघर लोगों का सुरक्षित स्थानों और सरकारी राहत शिविरों में शरण लेने का क्रम लगातार जारी है. जिला प्रशासन द्वारा स्थापित राहत शिविरों में भोजन की व्यवस्था एक बड़ी राहत साबित हो रही है, जहाँ सैकड़ों लोग हर दिन दो वक्त का पौष्टिक भोजन पा रहे हैं.

इसके अलावा सदर प्रखंड अंतर्गत सीताकुंड उच्च विद्यालय और सीताकुंड डीह विद्यालय में भी संचालित सामुदायिक रसोई के जरिए सैकड़ों बाढ़ पीड़ितों को सुबह-शाम ताजा और गर्म खाना मुहैया कराया जा रहा है.

बाढ़ के पानी से भरा सीताकुंड | Prabhat Khabar Network

सड़कों पर तीन फीट पानी: लाल दरवाजा, लल्लू पोखर में नाव ही सहारा

बाढ़ का गंदा पानी सड़कों और गलियों में जमा रहने से आवागमन पूरी तरह ठप पड़ा हुआ है. शहर के लाल दरवाजा, लल्लू पोखर, चुआबाग, चंदनबाग और हेरू दियारा जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में हजारों परिवार पानी के बीच कैद हैं.

लोगों को पीने का पानी, दूध और राशन जैसी अनिवार्य दैनिक सामग्री खरीदने के लिए कमर भर गंदे पानी को पार कर मुख्य बाजार आना पड़ रहा है. वहीं ग्रामीण क्षेत्र में सीताकुंड मुख्य मार्ग को एनएच-80 से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण हसनपुर-हरदियाबाद सड़क पूरी तरह जलमग्न हो जाने से वाहनों का परिचालन पूरी तरह बंद है. सीताकुंड डीह गांव जाने वाली सड़क पर भी तेज धार बहने के कारण ग्रामीण जान जोखिम में डालकर आवाजाही कर रहे हैं.

धार्मिक स्थलों पर बाढ़ का असर

बाढ़ की इस त्रासदी ने आस्था और पर्यटन के प्रमुख केंद्रों को भी अपनी चपेट में ले रखा है. अंग क्षेत्र के प्रसिद्ध 52 शक्तिपीठों में शुमार मां चंडिका स्थान का संपूर्ण प्रांगण और गर्भगृह बाढ़ के पानी में डूबा हुआ है, जिसके कारण पिछले 10 दिनों से मंदिर में आम श्रद्धालुओं के लिए दर्शन और विधिवत पूजा-पाठ पूरी तरह स्थगित है.

वहीं ऐतिहासिक और धार्मिक पर्यटन स्थल सीताकुंड के चारों ओर भी बाढ़ का पानी फैला हुआ है. प्रशासनिक आकलन के अनुसार, भले ही गंगा का पानी धीरे-धीरे कम हो रहा हो, लेकिन सड़कों और रिहायशी बस्तियों से जल की निकासी होकर हालात सामान्य होने में अभी कई दिनों का लंबा वक्त लग सकता है.

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By Birendra Kumar Sing

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