धौनी चौरा नदी बनी कचरा डंपिंग यार्ड, जहरीले पानी से सिंचाई करने को मजबूर तारापुर के किसान

Dhoni Chaura River Pollution: मुंगेर जिले के तारापुर प्रखंड में धौनी चौरा नदी प्रशासनिक उदासीनता के कारण अस्तित्व के संकट से जूझ रही है. शहर का सारा कूड़ा-कचरा और नालों का गंदा पानी इस नदी में बहाए जाने से यह एक बड़े डंपिंग ज़ोन में तब्दील हो चुकी है, जिससे स्थानीय किसानों की फसलों के साथ-साथ ग्रामीणों की सेहत पर भी बड़ा खतरा मंडरा रहा है.

तारापुर (मुंगेर) से संजय वर्मा की रिपोर्ट

Dhoni Chaura River Pollution: एक तरफ जहां सरकार नदियों को स्वच्छ रखने और पर्यावरण संरक्षण के दावों पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं तारापुर प्रखंड में जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है. धौनी चौरा नदी इन दिनों शहर की गंदगी का शिकार हो रही है. नदी के पुल और उसके आसपास के किनारों पर थर्माकोल के डिब्बे, प्लास्टिक की थैलियां, सड़े-गले घरेलू अपशिष्ट और रसायनों का ढेर लगा हुआ है. हवा और पानी के बहाव के साथ यह जहरीला कचरा मुख्य जलस्रोत में मिलकर पानी को पूरी तरह दूषित कर रहा है.

प्रदूषित पानी से खेती और मिट्टी हो रही बर्बाद

धौनी चौरा नदी का पानी इस इलाके के सैकड़ों किसानों के लिए सिंचाई का एकमात्र और मुख्य जरिया है. स्थानीय किसानों का कहना है कि कचरे और नाले के जहरीले पानी के मिश्रण से नदी का जल अब पूरी तरह दूषित हो चुका है. इस हानिकारक पानी से सिंचाई करने के कारण खेतों की उपजाऊ मिट्टी खराब हो रही है, जिससे फसलों की गुणवत्ता पर सीधा असर पड़ रहा है और फसलें समय से पहले बर्बाद हो रही हैं.

किसानों को त्वचा रोग और आम लोगों की सेहत पर आफत

नदी के इस प्रदूषित पानी के इस्तेमाल से न केवल फसलों को नुकसान हो रहा है, बल्कि इंसानों और मवेशियों की जान भी जोखिम में है:

  • त्वचा संबंधी बीमारियां: दूषित पानी के लगातार संपर्क में रहने के कारण खेतों में काम करने वाले किसानों को त्वचा (स्किन) संबंधी गंभीर बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है.
  • सब्जियों में जहर: इस पानी से उपजी फसलों और सब्जियों का सेवन करने से आम नागरिकों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ रहा है.
  • मवेशियों की मौत का खतरा: नदी किनारे चरने के लिए आने वाले बेजुबान मवेशी अक्सर झाड़ियों में फंसे प्लास्टिक और कचरे को खा लेते हैं, जिससे उनके पेट में संक्रमण हो जाता है और उनकी जान पर बन आती है.

श्रावणी मेले से ठीक पहले महामारी का डर

विश्वप्रसिद्ध सुल्तानगंज-देवघर श्रावणी मेला बिल्कुल नजदीक है और इस मुख्य मार्ग से रोजाना हजारों श्रद्धालुओं और आम नागरिकों की आवाजाही होती है. इसके बावजूद नदी को कचरे से पाटना स्थानीय प्रशासन की घोर लापरवाही को उजागर करता है. धूप के कारण कचरे के सड़ने से आसपास के पूरे वातावरण में भयंकर बदबू फैली रहती है, जिससे पूरे इलाके में संक्रामक बीमारियां और महामारी फैलने का डर बना हुआ है.

Dhoni Chaura River Pollution: ग्रामीणों ने की कचरा डंपिंग पर रोक लगाने की मांग

इस बदहाली को लेकर स्थानीय किसानों और ग्रामीणों में नगर पंचायत व जिला प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश है. प्रभावित ग्रामीणों ने जिलाधिकारी और संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि नदी में शहर का कूड़ा और गंदा पानी गिराने पर तुरंत कानूनी रोक लगाई जाए. साथ ही नदी में पहले से जमा हो चुके कचरे की युद्धस्तर पर सफाई कराकर नदी के ऐतिहासिक अस्तित्व और किसानों की आजीविका को समय रहते बचाया जाए.

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लेखक के बारे में

Published by: Divyanshu Prashant

दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में परास्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे दैनिक जागरण में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। इसके अतिरिक्त उन्होंने टी. एन. बी. कॉलेज से हिंदी साहित्य में स्नातक किया है, जिसके कारण साहित्य, पठन-पाठन, लेखन और कविता-सृजन में उनकी विशेष रुचि है। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।

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