जिले की प्रमुख आस्था और सांस्कृतिक धरोहर माने जाने वाले इस मंदिर में श्रद्धालुओं ने कतारबद्ध होकर हनुमान जी को सिंदूर, चोला, नारियल और लड्डू अर्पित किए. भक्तों ने सुंदरकांड और हनुमान चालीसा का पाठ कर बजरंगबली से परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और आरोग्य की कामना की.
मन्नतें होती हैं पूरी, गूंजे बजरंगबली के जयकारे
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सच्चे मन से की गई पूजा से सभी संकट दूर होते हैं:
- भक्तिमय पाठ: प्रत्येक मंगलवार को मंदिर परिसर में सामूहिक सुंदरकांड और हनुमान चालीसा के पाठ का विशेष आयोजन होता है, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहता है.
- विशेष अर्पण: मान्यता है कि मंगलवार को संकटमोचन को चोला चढ़ाने से जीवन के कष्ट मिटते हैं, इसी आस्था के साथ श्रद्धालु दूर-दराज से यहां पहुंचते हैं.
मुंगेर की विसर्जन परंपरा का मुख्य केंद्र
बड़ा महावीर स्थान केवल आम दिनों की पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि शहर की ऐतिहासिक विसर्जन परंपरा से भी गहराई से जुड़ा हुआ है:
- दुर्गा पूजा में विशेष महत्व: विजयादशमी के दिन मां दुर्गा की प्रतिमाओं के विसर्जन से पूर्व इस ऐतिहासिक मंदिर के समीप ही माता की भव्य महाआरती की जाती है.
- शोभायात्रा की शुरुआत: महाआरती संपन्न होने के बाद ही शहर की प्रसिद्ध और पारंपरिक विसर्जन शोभायात्रा मुख्य मार्गों के लिए रवाना होती है, जो मुंगेर की सामाजिक व धार्मिक संस्कृति का एक अभिन्न हिस्सा है.
