टेटिया बंबर (मुंगेर). जिले के टेटिया बंबर प्रखंड क्षेत्र में बच्चों को पिलायी जाने वाली 40 पेटियां आयरन सिरप नदी किनारे झाड़ियों में मिलने से हड़कंप मच गया है. ये दवाएं मनरेगा योजना से निर्मित गाइड वॉल के समीप झाड़ियों में मिली है. ग्रामीणों का आरोप है कि यह दवा सीडीपीओ कार्यालय परिसर से निकलवाकर वहां फेंकी गयी है. ग्रामीणों की सूचना पर टेटिया बंबर थाना पुलिस मौके पर पहुंच की दवाओं को जप्त कर लिया है और मामले की जांच की जा रही है. ग्रामीणों को जानकारी मिली कि नदी किनारे झाड़ियों में बड़ी संख्या में आयरन सिरप की फेंकी हुई हैं.
सिरप आंगनबाड़ी केंद्रों व बच्चों को उपलब्ध करायी जाती है
सिरप आंगनबाड़ी केंद्रों और पोषण कार्यक्रमों के तहत बच्चों को उपलब्ध करायी जाती है. आयरन सिरप का इस्तेमाल बच्चों में एनीमिया यानी खून की कमी दूर करने के लिए किया जाता है. ऐसे में इतनी बड़ी मात्रा में दवा का खुले में पड़ा मिलना कई सवाल खड़े कर रहा है. स्थानीय लोगों का दावा है कि हाल में आयी बाढ़ के दौरान भी बड़ी मात्रा में आयरन सिरप नदी के पानी में बहा दी गयी. ग्रामीणों के अनुसार करीब 40 पेटियां सीडीपीओ कार्यालय से लगभग 100 गज की दूरी पर नदी किनारे झाड़ियों में फेंकी गयी हैं. ग्रामीणों ने पूरे मामले की जांच के लिए प्रखंड कार्यालय परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालने की मांग की है।
स्टॉक व वितरण पंजी की जांच की मांग
विदित हो कि सरकार बच्चों के स्वास्थ्य सुधार और कुपोषण दूर करने के लिए लगातार योजनाएं चला रही है. ऐसे में यदि बच्चों के लिए उपलब्ध करायी गयी दवा जरूरतमंदों तक पहुंचने के बजाय खुले में फेंकी जा रही है, तो यह गंभीर मामला है. जबकि कई आंगनबाड़ी केंद्रों पर समय-समय पर दवा की कमी की शिकायतें सामने आती हैं, तब इतनी बड़ी मात्रा में सिरप बाहर कैसे पहुंची. यदि दवा के स्टॉक रजिस्टर, वितरण पंजी, संबंधित गोदाम और आंगनबाड़ी केंद्रों के रिकॉर्ड की जांच करायी जा तो मामले का खुलासा हो पायेगा.
