असरगंज (मुंगेर) हिमांशु कुमार सिंह की रिपोर्ट
Aaj Ka Darshan: मुंगेर जिले के असरगंज प्रखंड के कमरांय गांव के समीप स्थित कर्पूरानाथ महादेव मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है. मान्यता है कि इस स्वयंभू शिवलिंग के दर्शन और पूजा करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं. यही कारण है कि यहां पूरे वर्ष श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है.
200 वर्ष पुराना है मंदिर का इतिहास
ग्रामीण बुजुर्गों के अनुसार, कर्पूरानाथ महादेव मंदिर का इतिहास करीब 200 वर्ष पुराना है. बताया जाता है कि इस स्थान पर खुदाई के दौरान शिवलिंग प्रकट हुआ था. ग्रामीणों ने शिवलिंग को निकालने का काफी प्रयास किया, लेकिन वे सफल नहीं हो सके. बाद में सुलतानगंज के तत्कालीन जागीरदार रंगलाल मुरारका और ग्रामीणों के सहयोग से यहां मंदिर का निर्माण कराया गया.
स्थानीय लोगों का मानना है कि यह शिवलिंग स्वयंभू है और इसका धार्मिक महत्व अत्यंत विशेष है.
कांवरियों का पहला पड़ाव था कर्पूरानाथ धाम
सड़क मार्ग विकसित होने से पहले सुलतानगंज से देवघर जाने वाले कांवरियों का पहला विश्राम स्थल यही मंदिर हुआ करता था. श्रद्धालु उत्तरवाहिनी गंगा से जल लेकर इसी मार्ग से बाबा बैद्यनाथ धाम जाते थे. यात्रा के दौरान कांवरिये यहां विश्राम करने के बाद भगवान शिव की पूजा-अर्चना कर आगे की यात्रा शुरू करते थे.
कहा जाता है कि महाराजा कृष्णानंद और बनेली महाराज ने भी कई बार इस मंदिर में जलाभिषेक कर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त किया था.
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हर सोमवार गूंजता है भजन-कीर्तन
कर्पूरानाथ महादेव मंदिर में प्रत्येक सोमवार को भव्य भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाता है. इसमें आसपास के गांवों के बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं. सावन और महाशिवरात्रि के दौरान मंदिर परिसर पूरी तरह भक्तिमय वातावरण में डूब जाता है.
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महाशिवरात्रि पर उमड़ती है श्रद्धालुओं की भीड़
महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां वार्षिक महोत्सव आयोजित किया जाता है. इस दौरान हजारों श्रद्धालु सुलतानगंज की उत्तरवाहिनी गंगा से जल लाकर भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं. मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए स्थानीय स्तर पर दर्शन व्यवस्था और सुरक्षा के भी इंतजाम किए जाते हैं.
Aaj Ka Darshan: श्रद्धालुओं के लिए जरूरी जानकारी
मंदिर असरगंज प्रखंड मुख्यालय के उत्तरी सीमा पर कमरांय गांव के पूर्वी भाग में स्थित है.
प्रत्येक सोमवार को विशेष भजन-कीर्तन का आयोजन होता है.
महाशिवरात्रि पर यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है.
दर्शन के लिए सुबह और शाम का समय श्रद्धालुओं के बीच अधिक लोकप्रिय है.
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