मुंगेर : पूर्ण शराबबंदी के बाद शराब के आदि हो चुके पियक्कड़ शराब नहीं मिलने के कारण धीरे-धीरे पस्त हो रहे. अब उन पियक्कड़ों ने गांजा और भांग का दामन थाम लिया है. जिनकी यारी खूब आपस में निभ रही है. गांजा की चौकड़ी में भीड़ बढ़ गयी है और शराबी मजे में गांजा का कश लगा रहे हैं. पूर्ण शराबबंदी के बाद गांजा और भांग का डिमांड काफी बढ़ गया है. क्योंकि शराबी का रुझान अब गांजा और भांग की तरफ बढ़ता जा रहा है.
पहले शराब की दुकानों शहरों में हुआ करती थी. लेकिन पिछले कुछ वर्षों से पंचायत स्तर पर शराब की दुकान खोल दिया गया था. जिसके कारण शराब की तरफ लोगों का रुझान काफी बढ़ गया था. गांजा और भांग पीने वाले ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को आसानी से शराब मुहैया होने लगी थी. जिसके कारण वैसे लोग गांजा और भांग का सेवन छोड़ शराब पीने लगे थे. धीरे-धीरे लोग शराब के आदि हो गये. लेकिन सरकार ने 1 अप्रैल 2016 से पूर्ण शराबबंदी कर दी.
जिसके कारण शराब लोगों को आसानी से मिलना बंद हो गया. अगर कहीं से शराब मिल भी जाये तो उसके लिए तिगुना दाम शराबी को भुगतान करना पड़ता है. आसानी से शराब नहीं मिलने और अत्यधिक खर्च को देखते हुए पियक्कड़ पस्त हो गये और उन्होंने गांजा और भांग का दामन थाम लिया. गांजा और भांग की डिमांड काफी बढ़ गयी है. एक गंजेरी ने बताया कि पहले 20 रुपये में कोटा पूरा हो जाता है. लेकिन अब गांजा बेचने वालों ने पुडि़या में गांजा की मात्रा की घटा दी है. जिसके कारण अब 40 रुपये में कोटा यानी नशा पूरा होता है.
भांग की जो साधारण गोली 1 रुपये में मिल जाती थी. उसकी कीमत 2 रुपये हो गयी है. जबकि स्पेशल भांग की कीमत में भी दुगुना हो गया है. मुंगेर में गांजे की तस्करी बड़े पैमाने पर होने लगी है. गंगा के माध्यम से मुंगेर में गांजा की तस्करी हो रही है. डिमांड बढ़ने के कारण तस्करी के धंधे में रोज नये-नये लोग जुड़ने लगे है. जबकि बोरा का बोरा भांग भी शहर में खूब बिक रहा है. जिस पर पुलिस की बंदिश कारगर साबित नहीं हो रहा है.
