ट्रेन पर तो चढ़ गये, सड़क यात्रा के लिए करना होगा लंबा इंतजार

मुंगेर : मुंगेर में गंगा नदी पर निर्मित रेल सह सड़क पुल के लोकार्पण के बाद सोमवार से यात्री ट्रेन सेवा का शुभारंभ हो गया और लोग मुंगेर से खगडि़या-बेगूसराय तक ट्रेन यात्रा करने लगे. लेकिन सड़क पुल बनने के बावजूद अभी इस पर यात्रा के लिए क्षेत्र के लोगों को लंबी इंतजार करनी होगी. […]

मुंगेर : मुंगेर में गंगा नदी पर निर्मित रेल सह सड़क पुल के लोकार्पण के बाद सोमवार से यात्री ट्रेन सेवा का शुभारंभ हो गया और लोग मुंगेर से खगडि़या-बेगूसराय तक ट्रेन यात्रा करने लगे. लेकिन सड़क पुल बनने के बावजूद अभी इस पर यात्रा के लिए क्षेत्र के लोगों को लंबी इंतजार करनी होगी. क्योंकि पुल तो बन कर तैयार है किंतु उसका एप्रोच पथ के लिए भूमि अधिग्रहण का कार्य भी नहीं हो पाया है.

करना होगा लंबा इंतजार . इस पुल के एप्रोच पथ के लिए भूमि अधिग्रहण का कार्य मंथर गति से चल रहा. हाल यह है कि 14 वर्षों में एप्रोच पथ के लिए भूमि का अधिग्रहण नहीं हो पाया. अलबत्ता दो वर्ष पूर्व इस एप्रोच पथ को भारत सरकार ने राष्ट्रीय उच्च पथ घोषित कर दिया और अब नये सिरे से भूमि अधिग्रहण का कार्य चल रहा है. लेकिन भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई जिस गति से चल रहा है. उससे लगता है कि अधिग्रहण की कार्रवाई में ही दो-तीन वर्ष बीत जायेंगे. उसके बाद सड़क निर्माण का कार्य होना है.
48 हेक्टेयर भूमि का होना है अधिग्रहण.
गंगा पुल को एनएच 80 से जोड़ने के लिए मुंगेर क्षेत्र में 48 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया जाना है. पुल के एप्रोच पथ का एनएच मुंगेर क्षेत्र में जहां राष्ट्रीय उच्च पथ 80 से जुड़ेगा. वहीं बेगूसराय क्षेत्र में राष्ट्रीय उच्च पथ 31 से जुड़ेगा. यह पथ मुंगेर नगर निगम के दस वार्डों एवं 34 मौजा के गांवों से गुजरेगी.
8 फेज में होना है अधिग्रहण की कार्रवाई . बताया जाता है कि एनएच एक्ट 1956 के तहत भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई की जा रही है. 8 फेज में अधिग्रहण की कार्रवाई होनी है. जिसमें मात्र थ्री सी के तक ही कार्रवाई पूरी हो सकी है. थ्री ए के तहत एनएचएआइ द्वारा अधिसूचना अक्तूबर माह में प्रकाशित की गयी थी जो अबतक पूर्ण नहीं हो पाया.
12 वर्ष बाद एप्रोच पथ बना एनएच . पूर्व बिहार के विकास से जुड़ा गंगा रेल सह सड़क पुल पूरी तरह राजनीतिक का शिकार होकर रह गया है. पुल के एप्रोच पथ को वर्ष 2014 में राष्ट्रीय उच्च पथ घोषित किया गया. अर्थात 12 वर्ष बाद एप्रोच पथ को एनएच का दर्जा मिला. जाहिर है कि
इस पुल निर्माण के लिए जवाबदेह रेल मंत्रालय से लेकर राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण एवं बिहार के राजनीतिज्ञ के कार्यशैली पर एक बड़ा सवाल पैदा हो रहा है. राज्य के पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं भाजपा के वरीय नेता सुशील मोदी ने भूमि अधिग्रहण के लिए सीधे तौर पर राज्य के नीतीश सरकार को जिम्मेदार ठहराया है.

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