अतिक्रमण के कारण मछली पालन व्यवस्था हो रही प्रभावित
मुंगेर. अंडर वाटर रिचार्ज के लिए बिहार सरकार ने जल-जीवन-हरियाली अभियान चला रखा है, लेकिन इसका असर मत्स्य विभाग के जलकर व तालाब पर नहीं है. इस कारण अधिकांश तालाब पर भू-माफियाओं ने कब्जा कर लिया है. कहीं मकान तैयार हो गये हैं, तो कहीं तालाब में खेती हो रही है. इस कारण जिले में मछली पालन कारोबार बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है. साथ ही रोजगार के साथ राजस्व को भी झटका लगा है. हालांकि, मत्स्य विभाग से तालाब को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए सभी सीओ को पत्र लिखा है.मत्स्य विभाग का अब भी 69 जलकर व तालाब अतिक्रमित
मत्स्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, जिले में विभाग का 205 जलकर व तालाब की संख्या है. इसमें 191 जलकर व तालाब की बंदोबस्ती विभाग द्वारा की गयी है. जिसमें पानी सुखने के कारण 14 की बंदोबस्ती विभाग नहीं कर पायी है. विभाग की माने तो मत्स्य विभाग के 69 जलकर व तालाब पर अतिक्रमणकारियों का कब्जा है. बरियारपुर के नाई टोला व राज जलकर पर अतिक्रमणकारियों का कब्जा है, जबकि मुंगेर सदर के मिर्ची तालाब, नौवागढ़ी पोखर व जमालपुर प्रखंड के मिठमोहनी पोखर, गंगटी पोखर, बादशाही पोखर हलिमपुर, सफियासराय पोखर सहित अन्य शामिल है. हालांकि, विभागीय प्रयास के बाद हवेली खड़गपुर में कुछ तालाब को मुक्त कराया जा चुका है.सरकारी नक्शे पर तालाब, जमीन पर मकान
दरअसल, सरकारी नक्शा और खतियान के अनुसार, इन तालाबों की जमीन सरकारी श्रेणी में दर्ज है और इन्हें जलस्रोत के रूप में संरक्षित रखा जाना चाहिए था. इसके बावजूद आरोप है कि अंचल कार्यालय के कुछ कर्मचारियों और अधिकारियों की मिलीभगत से तालाबों की जमीन का नेचर बदलकर पंजी-2 में रैयती दर्ज कर दिया गया. इसके बाद भू-माफियाओं ने इन जमीनों को प्लॉटिंग कर बेचने का खेल शुरू कर दिया. जिले में यह खेल पिछले कुछ वर्ष से चलता आ रहा है. इतना ही नही कई तालाब में तो खेती-बारी हो रही है. खड़गपुर प्रखंड के राजा-रानी में न सिर्फ मकान बना लिया गया है, बल्कि उसमें खेती-बारी हो रही थी. जिसे प्रशासनिक स्तर पर जैसे-तैसे अतिक्रमण मुक्त कराया गया.रोजगार व राजस्व दोनों को क्षति
शहर से लेकर गांव तक मत्स्य विभाग के तालाब, पोखर पर कब्जा होने के कारण मछली पालन का कारोबार नहीं होता है. इस कारण मत्स्यजीवि सहयोग समिति से जुड़े मछुआरा बेरोजगार हो रहे है. उनको रोजगार के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है. कुछ मछुआरे तो पलायन कर गये है. राजस्व को भी भारी क्षति हो रही है.कहते हैं डीएफओ
जिले में 69 सरकारी जलकर व तालाब ऐसे हैं, जिस पर अतिक्रमण है. जिसे अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए जिले को सूची उपलब्ध करा दी गयी है, जबकि संबंधित अंचल अधिकारी को भी तालाबों को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए पत्र लिखा गया है.मनीष रस्तोगी, जिला मत्स्य पदाधिकारी
