खेतों में पड़ी दरारें, किसान मायूस

कजरा : आश्विन माह में हथिया नक्षत्र में भी वर्षा नहीं होने से जहां क्षेत्र की 80 फीसदी धान की फसल सूखने की कगार पर है व खेतों में दरार आ चुकी है. कहीं धान की फसल में अधकचरी बालियां आयी हैं तो कहीं बाली आयी ही नहीं. पानी के अभाव में पौधे सूख रहे […]

कजरा : आश्विन माह में हथिया नक्षत्र में भी वर्षा नहीं होने से जहां क्षेत्र की 80 फीसदी धान की फसल सूखने की कगार पर है व खेतों में दरार आ चुकी है. कहीं धान की फसल में अधकचरी बालियां आयी हैं तो कहीं बाली आयी ही नहीं. पानी के अभाव में पौधे सूख रहे हैं. अब किसानों को खेतों में नमी की चिंता सता रही है.

किसानों के मुताबिक धान की फसल पहले ही बारिश की भेंट चढ़ रही है. ऐसे में वर्षा नहीं होने से नमी के अभाव में रबी फसल तेलहन, दलहन की उपज पर भी संकट गहराता जा रहा है. पोखरामा के किसान शैलेन्द्र सिंह, प्रफुल्ल कुमार सिंह, कोनीपार के किसान दशरथ प्रसाद मेहता, रामचंद्र मंडल, बाकरचक के किसान सचिदानंद सिंह, उरैन के किसान अनिल कुमार यादव, श्री घना के बिंदेश्वरी प्रसाद गुप्ता आदि ने बताया कि इस साल औसत से काफी कम बारिश हुई

जिससे किसान भुखमरी की कगार पर हैं. किसानों के मुताबिक सिंचाई सुविधा के अभाव में यहां के किसान पूरी तरह मानसून पर निर्भर करते हैं. एक भी सरकारी ट्यूबेल चालू नहीं हैं. अगर मोरवे डेम का गुणवत्तापूर्ण निर्माण कार्य हो पाता तो क्षेत्र के किसानों को सूखे की मार नहीं झेलनी पड़ती.

मानसून की बेरुखी से धान की फसल चौपट
सूर्यगढ़ा. इन दिनों प्रखंड के धनहर क्षेत्र में खेतों में लगाये गये धान की फसल सूखने लगी है. 700 हेक्टेयर में लगे धान की फसलों में धान का फसल लगने से पूर्व पौधा मुरझाने लगा है. मालूम हो कि इस वर्ष मौसम विभाग द्वारा 80 प्रतिशत बारिश के आसार कहे जाने से क्षेत्र के किसानों ने अपनी खेतों में धान की बुआई की. लेकिन हथिया नक्षत्र में बारिश नहीं होने से धान की फसल बुरी तरह बर्बादी के कगार पर पहुंच गया है. किसान को लागत मूल्य भी निकाल पाना कठिन हो गया है. किसान धान की फसल के मारे जाने के बाद रबी फसल की बुआई करने में भी खुद को अक्षम साबित पा रहे हैं व इससे काफी मायूस हैं.

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